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Mathura News: 86.13 करोड़ से 90 सड़कों का होगा उद्धार
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मथुरा। मथुरा-वृंदावन नगर निगम क्षेत्र की सड़कों की तस्वीर बदलने जा रही है। शासन ने सड़कों के जीर्णोद्धार समेत 90 विकास कार्यों को मंजूरी दी है। इन कार्यों के लिए शासन ने 86.13 करोड़ रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। पहली किस्त के रूप में 43.6 करोड़ रुपये अवमुक्त कर किए गए हैं।
नगर पालिका मथुरा-वृंदावन का अस्तित्व हटाकर वर्ष 2017 में मथुरा-वृंदावन नगर निगम बनाया गया। इसके बाद दो बार में शहर के आसपास की 50 ग्राम पंचायतों के आंशिक भाग को नगर निगम की सीमा में शामिल किया गया। ये क्षेत्र शामिल हो गए, लेकिन अपेक्षा के अनुरूप यहां मूलभूत सुविधाएं विकसित नहीं हो पाई हैं।
नगर निगम ने इन क्षेत्र के विकास के लिए बीतेे महीने प्रस्ताव भेजे थे। इनमें 90 गलियां एवं प्रमुख मार्ग एवं नाली निर्माण के प्रस्तावों को मंजूरी दिलाने के लिए महापौर प्रयासरत थे। शासन ने त्वरित योजना के तहत राज्य सेक्टर से इन कामों को स्वीकृति दे दी है। अब नगर निगम टेंडर प्रक्रिया की तैयारी में जुट गया है।
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पेयजल को भी मिले पैसा तो बुझे प्यास
नगर निगम क्षेत्र की नई आबादी के कई वार्ड व गलियां ऐसी हैं, जहां पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। इसके लिए नगर निगम ने गंगाजल पेयजल परियोजना का प्रस्ताव शासन को भेजा है। वहीं गंगाजल की उपलब्धता की मांग की गई है। प्रस्ताव को मंजूरी मिले तो नई आबादी की हर गली व हर घर में शुद्ध पेयजल पहुंच सकेगा।
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नगर पालिका मथुरा-वृंदावन का अस्तित्व हटाकर वर्ष 2017 में मथुरा-वृंदावन नगर निगम बनाया गया। इसके बाद दो बार में शहर के आसपास की 50 ग्राम पंचायतों के आंशिक भाग को नगर निगम की सीमा में शामिल किया गया। ये क्षेत्र शामिल हो गए, लेकिन अपेक्षा के अनुरूप यहां मूलभूत सुविधाएं विकसित नहीं हो पाई हैं।
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नगर निगम ने इन क्षेत्र के विकास के लिए बीतेे महीने प्रस्ताव भेजे थे। इनमें 90 गलियां एवं प्रमुख मार्ग एवं नाली निर्माण के प्रस्तावों को मंजूरी दिलाने के लिए महापौर प्रयासरत थे। शासन ने त्वरित योजना के तहत राज्य सेक्टर से इन कामों को स्वीकृति दे दी है। अब नगर निगम टेंडर प्रक्रिया की तैयारी में जुट गया है।
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पेयजल को भी मिले पैसा तो बुझे प्यास
नगर निगम क्षेत्र की नई आबादी के कई वार्ड व गलियां ऐसी हैं, जहां पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। इसके लिए नगर निगम ने गंगाजल पेयजल परियोजना का प्रस्ताव शासन को भेजा है। वहीं गंगाजल की उपलब्धता की मांग की गई है। प्रस्ताव को मंजूरी मिले तो नई आबादी की हर गली व हर घर में शुद्ध पेयजल पहुंच सकेगा।