दस साल की वंदना पाल रही एक साल के भाई को

ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा Updated Mon, 20 Jun 2016 12:16 AM IST
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jawahar bagh file photo - फोटो : अमर उजाला
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दस साल वंदना अपने एक साल के भाई को पाल रही है। जिस उम्र में उसे खुद सहारे के लिए मां-बाप की जरूरत है, उसमें वह उसे अपने भाई का सहारा बनना पड़ रहा है। वह रोता है तो चुप करती है, हंसाने का प्रयास करती है। खाने पीने से लेकर सोने तक उसकी जरूरतों का ख्याल रखती है। जवाहर बाग हिंसा के बाद से उसके माता-पिता लापता है। यह अकेली वंदना की पीड़ा नहीं बल्िक 58 बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता-पिता का जवाहर बाग हिंसा के बाद से कोई पता नहीं हैं।
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नारी निकेतन में रह रही दस साल की बच्ची वंदना खुद को लखीमपुर खीरी का रहने वाला बता रही है। उसके साथ एक साल का भाई भी है। वंदना का कहना है कि उसके मम्मी-पापा पांच महीने पहले ही जवाहर बाग में आए थे। जिस दिन हिंसा हुई वह सभी लोग साथ थे। जब शोर मचना शुरू हुआ तो सभी भागने लगे। मम्मी-पापा ने उससे भी छुप जाने के लिए कहा।


वह अपने एक साल के भाई के साथ कैंप के पास चली गई। जहां से पुलिस वालों ने पकड़ लिया। उसके मम्मी-पापा का कोई पता नहीं चल रहा है। वह अपने एक साल के भाई को संभाल रही है। नारी निकेतन की अधीक्षिका बीना शर्मा ने बताया कि वंदना ने जो पता बताया है, उस पर संपर्क किया जा रहा है। छोटे बच्चे का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है। 

 जवाहर बाग की हिंसा में 58 बच्चों के माता-पिता लापता हो गए। वे कहां हैं, किस हाल में हैं, कोई नहीं जानता। प्रशासन बच्चों से बातचीत कर, उनके घरवालों सेे संपर्क साधने का प्रयास कर रहा है, लेकिन कुछ बच्चे इतने छोटे हैं कि वह ठीक से पता बताने की स्थिति में नहीं हैं, जिसके चलते  उनकी तलाश कर पाना मुश्किल हो रहा है। ऐसी स्थिति में पुलिस अब जेल में बंद कब्जाधारियों से बच्चों की पहचान कराने का प्रयास कर रही है। 

जवाहर बाग में 2 जून को हुई हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा तो वह है जो प्रशासनिक रिकार्ड में है। जबकि जिस तरह से लोग अपनों की तलाश में भटक रहे हैं उससे संख्या कहीं ज्यादा भी हो सकती है। इस समय प्रशासन का सबसे बड़ा सिरदर्द है जवाहर बाग से बरामद उन बच्चों के परिवार को ढूंढना है, जिनके माता- पिता का पता नहीं चल रहा है।

जवाहर बाग में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, बिहार और यूपी के कन्नौज, बलिया, लखीमपुर खीरी, बदायूं, गोरखपुर, कुशीनगर, जालौन, आजमगढ़, बस्ती, बरेली, झांसी और कानपुर तक के लोग रह रहे थे। हालांकि पुलिस मानकर चल रही है कि इसमें तमाम बच्चों के परिवार वाले जेल में ही बंद होंगे। जेल में भी सभी की पहचान कराई जा रही है। जिन बच्चों ने अपने घर का पता बता दिया था वहां सूचना भेजी जा रही है। कुछ के घर वाले आ भी रहे हैं।

प्रशासनिक आंकड़ा
0 से 9 साल के 10 बच्चे बाल सुधार गृह मथुरा में रह रहे हैं
10 से 16 साल के 23 लड़के बाल सुधार गृह फीरोजाबाद में रह रहे हैं

10 से 16 साल की 20 लड़कियां नारी निकेतन मथुरा में रह रही हैं
(पांच साल तक की उम्र के पांच बच्चों को एटा जेल भेजा था, लेकिन उनकी मां न होने पर वापस लाया जा रहा है)

57 महिलाओं के साथ सजा काट रहे 73 बच्चे
जवाहर बाग हिंसा के दौरान पुलिस ने 57 महिलाओं को गिरफ्तार किया था। इनमें अधिकांश घायल थीं। सभी का उपचार कराने के बाद जेल भेज दिया गया था। प्रशासन इन सभी को एटा जेल में शिफ्ट कर चुका है। अब अपनी माताओं के साथ यह 73 बच्चे भी जेल काट रहे हैं। इन सभी की उम्र पांच साल तक है। क्योंकि इस समय जेल में क्षमता से कई गुना बंदी हैं लिहाजा प्रशासन के सामने भी संकट खड़ा हो गया है। एक महिला ने तो जेल पहुंचने के बाद बेटे को जन्म दिया है।

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