{"_id":"651478472be33b34a9006bb4","slug":"5-km-part-of-vrindavan-minor-missing-search-could-not-be-done-even-in-a-year-mathura-news-c-369-1-mt11004-894-2023-09-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: वृंदावन माइनर का 5 किमी हिस्सा गायब, एक साल में भी नहीं हो पाई तलाश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: वृंदावन माइनर का 5 किमी हिस्सा गायब, एक साल में भी नहीं हो पाई तलाश
विज्ञापन
वृंदावन। ब्रज में भूजल खारा होने के कारण वृंदावन के प्राचीन कुंड, सरोवर और बावड़ियों को मीठा पानी पहुंचाने के लिए बनाई वृंदावन माइनर (नहर) गुम हो गई है। देखरेख के अभाव में जंगल में तब्दील नहर की अधिकांश जमीन पर लोगों ने पक्के कब्जे कर लिए हैं। नौ किलोमीटर लंबी नहर अब 4 किलोमीटर में सिमट गई है। डीएम द्वारा गठित संयुक्त टीम एक साल गुजरने के बाद भी नहर के शेष पांच किलोमीटर हिस्से का पता नहीं लगा पाई है।
वृंदावन के कुंडों और ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के बगीचे में मीठा पानी पहुंचाने के लिए वर्ष 1948 में वृंदावन माइनर के लिए गजट जारी किया गया। इसके बाद सिंचाई विभाग द्वारा लगभग 9 किलोमीटर लंबी नहर वर्ष 1952 में बनाई गई। शेरगढ़ रजबाहा से लेकर राजपुर स्थित बावड़ी तक बनीं नहर की अनदेखी के कारण लोगों ने इसकी जमीन पर कब्जे कर भवनों का निर्माण कर लिया। 50 फीट चौड़ी नहर के कब्जों से बचे हिस्से पर घना जंगल हो गया है। पुरानी नहर को बचाने के लिए वृंदावन के समाजसेवी अखिल अग्रवाल द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जो कि लंबित है।
लोगों की शिकायत पर डीएम सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर नहर की जमीन चिह्नित करने के निर्देश दिए। लगभग एक साल होने पर भी संयुक्त टीम वृंंदावन माइनर (नहर) की जमीन चिह्नित नहीं कर पाई हैं कि आखिर नहर की जमीन कहां है और इसकी कितनी जमीन पर कब्जा हो चुका है। सिंचाई विभाग के जेई पवन उपाध्याय ने बताया कि नौ किलोमीटर लंबी नहर है, जिसकी चौड़ाई करीब 50 फीट है। डीएम द्वारा राजस्व विभाग और सिंंचाई विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई, जिसे लगभग एक वर्ष हो गया। वर्तमान में इस नहर के चार किलोमीटर लंबाई में पानी चल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
वृंदावन के कुंडों और ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के बगीचे में मीठा पानी पहुंचाने के लिए वर्ष 1948 में वृंदावन माइनर के लिए गजट जारी किया गया। इसके बाद सिंचाई विभाग द्वारा लगभग 9 किलोमीटर लंबी नहर वर्ष 1952 में बनाई गई। शेरगढ़ रजबाहा से लेकर राजपुर स्थित बावड़ी तक बनीं नहर की अनदेखी के कारण लोगों ने इसकी जमीन पर कब्जे कर भवनों का निर्माण कर लिया। 50 फीट चौड़ी नहर के कब्जों से बचे हिस्से पर घना जंगल हो गया है। पुरानी नहर को बचाने के लिए वृंदावन के समाजसेवी अखिल अग्रवाल द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जो कि लंबित है।
विज्ञापन
लोगों की शिकायत पर डीएम सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर नहर की जमीन चिह्नित करने के निर्देश दिए। लगभग एक साल होने पर भी संयुक्त टीम वृंंदावन माइनर (नहर) की जमीन चिह्नित नहीं कर पाई हैं कि आखिर नहर की जमीन कहां है और इसकी कितनी जमीन पर कब्जा हो चुका है। सिंचाई विभाग के जेई पवन उपाध्याय ने बताया कि नौ किलोमीटर लंबी नहर है, जिसकी चौड़ाई करीब 50 फीट है। डीएम द्वारा राजस्व विभाग और सिंंचाई विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई, जिसे लगभग एक वर्ष हो गया। वर्तमान में इस नहर के चार किलोमीटर लंबाई में पानी चल रहा है।
विज्ञापन