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रिपोर्ट थी चार की लेकिन 40 बंद मिलीं
अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Sun, 08 May 2016 11:52 PM IST
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रिपोर्ट थी चार की लेकिन 40 बंद मिलीं
- फोटो : अमर उजाला
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ग्रामीण अंचल में पेयजल आपूर्ति की बड़ी जिम्मेदारी संभाले जल निगम के अफसर पानी के लिए जमीन पर कम कागजों पर ज्यादा काम करते नजर आ रहे हैं। जनपद में स्थापित 182 एकल पाइप लाइन योजनाओं में 40 ऐसी पकड़ में आई हैं, जिन्हें जल निगम ने अपनी रिपोर्ट में आंशिक या फिर चालू दर्शा दिया लेकिन ये पूर्ण रूप से बंद पड़ी हैं।
जनपद के ग्रामीण अंचल में 182 एकल पाइप पेयजल योजनाएं जल निगम की ओर से विभिन्न सालों में स्थापित की गई हैं। एक अप्रैल तक इनकी स्थिति पर सीडीओ मनीष कुमार वर्मा ने सत्यापन कराया तो कागजी हेराफेरी सामने आ गई। जल निगम की रिपोर्ट में टीटीएसपी की 182 योजनाओं में से सिर्फ 4 योजनाओं को बंद बताया गया था। सत्यापन में 48 योजनाएं बंद मिलीं। जल निगम की ओर से आंशिक रूप से संचालित दर्शाई गई योजनाएं भी बंद मिलीं। जल निगम ने उन योजनाओं को भी चालू दर्शा दिया जहां बिजली का कनेक्शन भी नहीं हुआ या फिर पाइप लाइन की समस्या थी।
गांव बाद स्थित 1979-80 में बनी योजना चालू दर्शा दी गई, जबकि यह वर्तमान में जर्जर अवस्था में है। जल निगम द्वारा बनाई गई इन योजनाओं में से अनेक का संचालन अब ग्राम पंचायतों के हाथ में है। फिर भी हालत खराब बनी हुई है।
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ब्लॉक स्तर पर सत्यापन रिपोर्ट को देखें तो मथुरा ब्लॉक की सबसे ज्यादा खराब स्थिति है। इस ब्लॉक में 15 पेयजल योजनाएं बंद हैं। यहां 35 योजनाएं स्थापित हैं। इसके बाद स्थिति बलदेव ब्लॉक की खराब है। इस ब्लॉक में भी 8 योजनाएं बंद पड़ी हैं।
सत्यापन रिपोर्ट के बाद बंद पड़ी योजनाओं को दुरुस्त कराया जा रहा है। पेयजल आपूर्ति में जो बाधा आ रही है, उससे संबंधित विभाग से उसे सही कराया जा रहा है। काफी योजनाओं को चालू कराया गया है। कनेक्शन भी कराए गए हैं।
-मनीष कुमार वर्मा, सीडीओ
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जनपद के ग्रामीण अंचल में 182 एकल पाइप पेयजल योजनाएं जल निगम की ओर से विभिन्न सालों में स्थापित की गई हैं। एक अप्रैल तक इनकी स्थिति पर सीडीओ मनीष कुमार वर्मा ने सत्यापन कराया तो कागजी हेराफेरी सामने आ गई। जल निगम की रिपोर्ट में टीटीएसपी की 182 योजनाओं में से सिर्फ 4 योजनाओं को बंद बताया गया था। सत्यापन में 48 योजनाएं बंद मिलीं। जल निगम की ओर से आंशिक रूप से संचालित दर्शाई गई योजनाएं भी बंद मिलीं। जल निगम ने उन योजनाओं को भी चालू दर्शा दिया जहां बिजली का कनेक्शन भी नहीं हुआ या फिर पाइप लाइन की समस्या थी।
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गांव बाद स्थित 1979-80 में बनी योजना चालू दर्शा दी गई, जबकि यह वर्तमान में जर्जर अवस्था में है। जल निगम द्वारा बनाई गई इन योजनाओं में से अनेक का संचालन अब ग्राम पंचायतों के हाथ में है। फिर भी हालत खराब बनी हुई है।
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ब्लॉक स्तर पर सत्यापन रिपोर्ट को देखें तो मथुरा ब्लॉक की सबसे ज्यादा खराब स्थिति है। इस ब्लॉक में 15 पेयजल योजनाएं बंद हैं। यहां 35 योजनाएं स्थापित हैं। इसके बाद स्थिति बलदेव ब्लॉक की खराब है। इस ब्लॉक में भी 8 योजनाएं बंद पड़ी हैं।
सत्यापन रिपोर्ट के बाद बंद पड़ी योजनाओं को दुरुस्त कराया जा रहा है। पेयजल आपूर्ति में जो बाधा आ रही है, उससे संबंधित विभाग से उसे सही कराया जा रहा है। काफी योजनाओं को चालू कराया गया है। कनेक्शन भी कराए गए हैं।
-मनीष कुमार वर्मा, सीडीओ