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Mathura News: खून की कमी से 4 महिलाओं की प्रसव के दौरान मौत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 27 Mar 2024 02:19 AM IST
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4 women died during delivery due to blood loss
चंद्रशेखर गौड़
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मथुरा। गर्भवती महिलाओं को खान-पान में लापरवाही, शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर पर नजर न रखना और इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। बीते साल एनीमिया के कारण प्रसव के दौरान 4 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 8 महिलाओं की प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव के कारण जान चली गई।
महिला को गर्भ धारण के बाद छोटी-मोटी परेशानियां होती रहती हैं, इनमें एनीमिया भी मुख्य है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गर्भावस्था से लेकर प्रसव के 42 दिन बाद तक गर्भवती महिलाओं की स्थिति पर नजर रखी जाती है। इन्हीं आंकड़ों के अनुसार बीते साल गर्भावस्था से लेकर प्रसव के 42 दिन बाद तक 19 महिलाओं की मौत हो गई। इनमें से 4 महिलाएं प्रसव के दौरान खून की कमी अर्थात एनीमिया के कारण जिंदगी की जंग हार गईं। 8 महिलाओं की प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव के कारण मौत हो गई। प्रसव से पूर्व हुए अधिक रक्तस्राव के कारण भी एक महिला की मृत्यु हो गई। वहीं 2 महिलाओं की मौत दिल का दौरा पड़ने से और 2 महिलाओं की मौत सेप्टिक से हुई। इनके अलावा अन्य कारणों से 2 गर्भवती महिलाओं की जान चली गई।
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एनीमिया से बचाव के उपाय

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कृष्णा शर्मा ने बताया कि एनीमिया कोई गंभीर बीमारी नहीं है. लेकिन इसके लिए गर्भवती महिलाओं को समय से दवाएं लेनी चाहिए। चिकित्सक की सलाह पूरी तरह माननी चाहिए। आहार में हरी-पत्तेदार सब्जियां, फल, अंकुरित अनाज, दही, अंडे, ड्राई फ्रूट्स, मछली आदि शामिल किए जा सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान आयरन की अधिकता वाला आहार लेना चाहिए।
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घट रही मृतकों की संख्या
गर्भावस्था से लेकर प्रसव के 42 दिनों बाद तक वर्ष 2021-22 में 26 महिलाओं की मौत हुई। वहीं वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा घटकर 22 महिलाओं पर आ गया। वर्ष 2023-24 में मात्र 19 महिलाओं की ही मौत हुई।


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स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिलाओं की गर्भावस्था से लेकर प्रसव के बाद तक लगातार निगरानी की जाती है। आशा और एएनएम द्वारा उनसे संपर्क किया जाता है। परेशानी होने पर दवाएं दी जाती हैं, और गर्भवती महिलाओं का प्रसव सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क कराया जाता है।

- डॉ. अजय कुमार वर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मथुरा
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