फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   married at a young age now preparing to divorce

यूपी: कम उम्र में शादी, अब तलाक की तैयारी

Thu, 17 Oct 2013 01:55 AM IST
अमर उजाला, इलाहाबाद
अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Thu, 17 Oct 2013 01:55 AM IST
विज्ञापन
married at a young age now preparing to divorce

महज सोलह-सत्रह साल की उम्र में अगर कोई कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटता नजर आए वह भी तलाक के मुकदमे को लेकर हैरत में पड़ना लाजमी है। पर यह हकीकत है। परिवार न्यायालय और परिवार परामर्श केंद्रों में ऐसे दंपतियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।

विज्ञापन


घर-परिवार या बिरादरी के दबाव में इनकी शादियां तो कच्ची उम्र में हो गईं पर समझ बढ़ते ही यह किशोर दंपति रिश्ता निभाने को तैयार नहीं हैं। अलगाव की इनके पास अलग-अलग वजहें हैं, पर असल मुद्दा एक ही है, दबाव में किए गए रिश्तों को यह निभाना नहीं चाहते हैं।
विज्ञापन


बिहार में मेडिकल की पढ़ाई कर रही नामिता (परिवर्तित नाम) का विवाह इलाहाबाद के आकाश (परिवर्तित नाम) के साथ 14 वर्ष की उम्र में हो गया। आकाश अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। नामिता ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 12 के तहत विवाह शून्य करण का वाद दाखिल किया है। इनका मामला अभी परिवार परामर्श केंद्र में है।
विज्ञापन
विज्ञापन


केंद्र की काउंसलर ऋतंधरा मिश्रा के मुताबिक शादी के समय इनकी समझ कच्ची थी। अब यह उस बंधन को निभाना नहीं चाहते हैं। केंद्र में दोनों पक्षों के बीच सुलह-समझौते का प्रयास किया जा रहा है।

बारा तहसील के भी एक नाबालिग दंपति ने विवाह शून्य करण का मुकदमा दाखिल किया है। लड़का पक्ष समाज और गांव वालों पर दबाव डालकर शादी करवाने के कारण अब रिश्ता निभाने को राजी नहीं है।

काउंसलर ऋतंधरा के मुताबिक केंद्र में आठ ऐसी ही आर्जियां आई हैं जिनमें दंपति नाबालिग हैं। कई तो ऐसे हैं जिनके अभिभावकों ने जन्म होते ही विवाह तय कर दिया था। बाद में शादी तो हुई पर जैसे ही दोनों लड़का-लड़की समझदार होते हैं वह रिश्तों को लेकर अपनी पसंद को तरजीह देने लगते हैं।


जिला न्यायालय स्थित मिडिएशन सेंटर के काउंसलर और वरिष्ठ वकील वीके राय के मुताबिक रिश्तों को लेकर युवाओं में समझ बढ़ी है। यही वजह है कि बचपन में माता-पिता द्वारा किए गए वादों को निभाने के लिए तैयार नहीं हैं।

मीडिएशन सेंटर का पहला प्रयास परिवार बचाने का होता है। कोशिश की जाती है कि रिश्ते टूटने के बजाए सुलह-समझौते से बात बन जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed