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साहब मेरा क्या जुर्म जो बैठा रखा थाने में

Mon, 02 Jan 2017 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी Updated Mon, 02 Jan 2017 11:47 PM IST
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What crime has my boss sat in the police station
police
पुलिस ही मानवाधिकारों का हनन कर रही है। सदर कोतवाली में पुलिस ने दो युवकों को बैठा रखा है। जबकि उनके परिवारीजनों को छोड़िए खुद युवकों को ही नहीं पता कि उन्हें किस जुर्म में बैठा रखा है। वहीं पुलिस भी कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। हवालात में बंद युवकों का पूर्व में भी कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
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अपराध के बाद तो अपराधी को सलाखों के पीछे करते देखा गया है, लेकिन कोतवाली पुलिस ने दो युवकों को महज शक के आधार पर पिछले चार दिन से थाने बैठा रखा है। पुलिस ने कन्नौज के छिबरामऊ थाना क्षेत्र के गांव डिपारी निवासी दलवीर सिंह को हिरासत में ले रखा है। दलवीर के मुताबिक किसी युवक से उसकी फोन पर बात होती थी। यही कारण बताकर उसे शुक्रवार शाम को पुलिस थाने ले आई। वहीं किशनी थाना क्षेत्र के गांव वैरागपुर निवासी नरेंद्र पुत्र एबरन सिंह को पुलिस शनिवार शाम चार बजे उठा ले आई थी। पत्नी सुनीता का कहना है कि उसे भी कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। पल्सर बाइक का भी कोई अता पता नहीं है। उधर, दलवीर की ओमनी भी गायब है। सुनीता का कहना है कि पुलिस मनमानी कर रही है वह इसकी शिकायत मानवाधिकार आयोग में भी करेगी। युवकों को अवैध हिरासत में क्यों रखा गया है।
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क्या कहते हैं जानकार
दीवानी न्यायालय में फौजदारी के अधिवक्ता अनिल कुमार शर्मा का कहना है कि पुलिस अब किसी को हिरासत में लेती है तो 24 घंटे के अंदर लिखापढ़ी कर चालान किया जाना चाहिए। उसके परिवारीजनों को पूरी जानकारी देनी चाहिए अगर पुलिस ने ऐसा नहीं किया तो यह अपराध की श्रेणी में आता है। मानवाधिकार एसोसिएशन ईएचएलए के पूर्व अध्यक्ष अभिषेक तोमर का कहना है कि इस तरह का कृत्य पुलिस कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते हैं। अगर वह अपराधी हैं तो उन्हें मामला दर्ज कर जेल भेजना चाहिए था। अवैध हिरासत में रखना कानून और मानवाधिकार का खुला उल्लंघन है।
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मामला संज्ञान में नहीं है अगर ऐसा कुछ किया गया है तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। शिष्यपाल सिंह,  एएसपी मैनपुरी
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