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...हम जिसमें बस रहे हैं, वो दुनिया तुम्हीं तो हो
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Thu, 21 Apr 2016 11:24 PM IST
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उर्स
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आगरा रोड स्थित खानकाहे रशीदिया में हजरत सूफी शाह महमूद मियां रहमतुल्लाह अलेह का एक दिवसीय उर्स का गुरुवार को कुलशरीफ के साथ समापन हो गया। अकीदतमंदों ने चादरपोशी कर मुराद मांगी।
शुरुआत इमाम साहब हजरत मोलाना हाफिज, कारी मोहम्मद आजाद, मोहम्मद मोमिन अशरफ साहब ने कुरआन-ए पाक की तिलावत के साथ की। इस अवसर तकरीर का आयोजन हुआ। इसमें मौलाना डाक्टर अहमद नईमी और अलीगढ़ से आए मौलाना सरवर रजा साहब ने बुजुर्गानेदीन की करामातों पर रोशनी डाली। आलिम हाफिज सहाब ने सूफियाना अंदाज में नातिया कलाम पेश किया। इसके बाद कव्वालियों का आयोजन हुआ। इसमें कव्वाल उवैस फैज ने दिल जिससे जिंदा है, वो तमन्ना तुम्हीं तो हो, हम जिसमें बस रहे हैं, वो दुनिया तुम्हीं तो हो पेश पर जायरीन को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा कव्वाल रिहान, शफी, फरीद अहमद, भूरा अमजद, गुलाम अब्बास ने अपने-अपने सूफियाना कलाम पेश किए।
इसके बाद खानकाहे रशीदिया के बच्चों ने नातिया कलाम पेश किए। इसमें हाफिज आलिम, हाफिज मोमिन, हाफिज जीशान, हाफिज आमिर, हाफिज नफीस, हाफिज अलियार, हाफिज शादाब आदि शामिल हैं। वहीं अकीदतमंदों ने दरगाह पर चादरपोशी की। कार्यक्रम में हजरत अली की पैदाइश भी धूमधाम से मनाई गई। इसके बाद कुल शरीफ की फातिहा हुई।
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शुरुआत इमाम साहब हजरत मोलाना हाफिज, कारी मोहम्मद आजाद, मोहम्मद मोमिन अशरफ साहब ने कुरआन-ए पाक की तिलावत के साथ की। इस अवसर तकरीर का आयोजन हुआ। इसमें मौलाना डाक्टर अहमद नईमी और अलीगढ़ से आए मौलाना सरवर रजा साहब ने बुजुर्गानेदीन की करामातों पर रोशनी डाली। आलिम हाफिज सहाब ने सूफियाना अंदाज में नातिया कलाम पेश किया। इसके बाद कव्वालियों का आयोजन हुआ। इसमें कव्वाल उवैस फैज ने दिल जिससे जिंदा है, वो तमन्ना तुम्हीं तो हो, हम जिसमें बस रहे हैं, वो दुनिया तुम्हीं तो हो पेश पर जायरीन को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा कव्वाल रिहान, शफी, फरीद अहमद, भूरा अमजद, गुलाम अब्बास ने अपने-अपने सूफियाना कलाम पेश किए।
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इसके बाद खानकाहे रशीदिया के बच्चों ने नातिया कलाम पेश किए। इसमें हाफिज आलिम, हाफिज मोमिन, हाफिज जीशान, हाफिज आमिर, हाफिज नफीस, हाफिज अलियार, हाफिज शादाब आदि शामिल हैं। वहीं अकीदतमंदों ने दरगाह पर चादरपोशी की। कार्यक्रम में हजरत अली की पैदाइश भी धूमधाम से मनाई गई। इसके बाद कुल शरीफ की फातिहा हुई।
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