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पुरस्कार लौटाने वाले साहित्यकार देशद्रोही : भदौरिया

Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User ब्यूरो,अमर उजाला मैनपुरी
ब्यूरो,अमर उजाला मैनपुरी Published by: Anonymous User Updated Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
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The literary award traitors return: Bhadouriya
मैनपुरी। राष्ट्रीय स्तर के साहित्यकारों और लेखकों का सम्मान लौटाना देशद्रोह है। जिस समय पाकिस्तान का झंडा कश्मीर में लहराया जा रहा था उस समय किसी ने कुछ नहीं कहा। पूरे देश में गोहत्या पर भी पुरस्कार नहीं लौटाए। अब पुरस्कारों पर यह लोग रानजीनिति कर रहे हैं। यह कहना है साहित्य भूषण से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार लाखन सिंह भदौरिया का।
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राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों को लौटाने की साहित्यकारों ने जो परंपरा शुरू की है उसको लेकर जिले के साहित्यकारों में खासी नाराजगी है। उनका कहना है कि साहित्यकारों को राजनीति नहीं करनी चाहिए। जो लोग पुरस्कार लौटा रहे हैं उन्हें वास्तव में उनकी योग्यता नहीं बल्कि राजनीतिक चाटुकारिता और पहुंच के चलते उस समय यह उपलब्धि हासिल हुई थी। यही कारण है कि अब यह लोग राजनीति कर रहे हैं। सहित्यकार लाखन सिंह भदौरिया का कहना है कि जब देशभर में गोहत्या हो रही है तब इनमें से किसी को कुछ नहीं दिख रहा। अब एक के बाद एक साहित्यकार पुरस्कार के कर्ज को उतारने के लिए ऐसा कर रहे हैं। यह गलत है।
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 वहीं वरिष्ठ साहित्यकार दीन मोहम्मद दीन ने कहा कि साहित्यकारों का कार्य है कि यदि समाज और राजनीति में कहीं बिखराव और पतन हुआ है तो उसे अपनी लेखनी से दिशा दें। वहीं समाज के लोगों को भी जागरूक करें। पुरस्कार एक सम्मान है जिसे लौटना सही नहीं है। फिर इतने समय बाद लौटाने का क्या अर्थ है। यह वह लोग हैं जो सत्ताधारी पार्टी के हमेशा नजदीक रहे और उसका लाभ उठाया। अब यह लोग राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह सरकारी पुरस्कारों से बड़ा साहित्यिक संस्थाओं द्वारा दिए गए पुरस्कार को बड़ा मानते हैं। वहीं यशभारती से सम्मानित लोगों को 50 हजार रुपये पेंशन देने की प्रदेश सरकार की घोषणा पर उन्होंने कहा कि हमेशा से सरकारी पुरस्कार हमेशा पैसे वालों और सत्ता के करीबियों को मिलते रहे हैं।
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अब यह घोषणा मोहर पर मोहर गिरने जैसी है। पहले से ही जो लोग सत्ता का लाभ उठा चुके हैं या उठा रहे हैं उन्हें ही यह पेंशन भी मिलेगी। ऐसे में वास्तव में जो लोग साहित्य की सेवा कर रहे हैं और गरीब हैं उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा।


साहित्यकार पदम सिंह पदम का कहना है कि साहित्यकारों का इस प्रकार पुरस्कार वापस करना सही नहीं है। सरकार और पार्टियों का कार्य राजनीति करना है हम लोगों का नहीं। यदि उन्हें लगता है कि कुछ गलत हो रहा है तो पुरस्कार वापस कर हथियार न डालें बल्कि कलम से क्रांति पैदा करें। तभी वह वास्वत में साहित्यकार कहलाएंगे।
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