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धान की पुआल जलाना है प्रदूषण का कारण
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Mon, 07 Nov 2016 11:02 PM IST
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धान की पुआल जलाना है प्रदूषण का कारण
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली ही नहीं मैनपुरी में भी प्रदूषण के लिए किसान काफी हद तक जिम्मेदार हैं। कारण यहां भी बड़ी मात्रा में धान की पुआल जलाई जाती है। यही कारण है कि औद्योगिक नगरी न होने के बाद भी यहां पर लोगों को जबरदस्त प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में लोगों का कहना है कि सरकार को चाहिए कि वह किसानों को पुआल जलाने के दुष्परिणामों को लेकर जागरूक करे। इसके लिए बकायदा अभियान चलाया जाना चाहिए।
दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जबरदस्त प्रदूषण के चलते वर्तमान में पूरे क्षेत्र में धुंध छाई हुई है। इसके चलते लोगों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बड़ी संख्या में लोगों को सांस और आंखों से संबंधित परेशानियां हो रही हैं। मैनपुरी में भी पिछले कई दिनों से लोगों को प्रदूषण के चलते छाई धुंध का सामना करना पड़ रहा है। इसका एक कारण जिले के किसानों द्वारा सैकड़ों हेक्टेयर में की गई धान की फसल की पुआल जलाना है। उल्लेखनीय है कि इस बार जिले में लगभग 75 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की फसल की गई थी। इसकी कटाई के बाद किसान बड़ी संख्या में पुआल जला रहे हैं। परिणामस्वरूप दीपावली पर हुई आतिशबाजी और धान की पुआल जलाने पर हुए धुएं ने मिलकर वातावरण में जहरीला धुआं की परत बना दी है।
इस संबंध में नवनीत गुप्ता ने बताया कि सरकार को चाहिए कि वह किसानों को ऐसा करने से रोके। ताकि वातावरण को हो रहे नुकसान को रोका जा सके। वहीं बैंक कालोनी निवासी गगन मिश्रा का कहना है कि सरकार को चाहिए वह किसानों को जागरुक करने के लिए विशेष अभियान चलाए। ताकि वह कटाई के बाद धान की पुआल को न जलाएं। वहीं इसका सही उपयोग करने का भी उपाय सरकार को करना चाहिए।
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दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जबरदस्त प्रदूषण के चलते वर्तमान में पूरे क्षेत्र में धुंध छाई हुई है। इसके चलते लोगों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बड़ी संख्या में लोगों को सांस और आंखों से संबंधित परेशानियां हो रही हैं। मैनपुरी में भी पिछले कई दिनों से लोगों को प्रदूषण के चलते छाई धुंध का सामना करना पड़ रहा है। इसका एक कारण जिले के किसानों द्वारा सैकड़ों हेक्टेयर में की गई धान की फसल की पुआल जलाना है। उल्लेखनीय है कि इस बार जिले में लगभग 75 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की फसल की गई थी। इसकी कटाई के बाद किसान बड़ी संख्या में पुआल जला रहे हैं। परिणामस्वरूप दीपावली पर हुई आतिशबाजी और धान की पुआल जलाने पर हुए धुएं ने मिलकर वातावरण में जहरीला धुआं की परत बना दी है।
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इस संबंध में नवनीत गुप्ता ने बताया कि सरकार को चाहिए कि वह किसानों को ऐसा करने से रोके। ताकि वातावरण को हो रहे नुकसान को रोका जा सके। वहीं बैंक कालोनी निवासी गगन मिश्रा का कहना है कि सरकार को चाहिए वह किसानों को जागरुक करने के लिए विशेष अभियान चलाए। ताकि वह कटाई के बाद धान की पुआल को न जलाएं। वहीं इसका सही उपयोग करने का भी उपाय सरकार को करना चाहिए।
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