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डाक्टरों की कमी से परेशान मरीज
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Sat, 25 Mar 2017 11:28 PM IST
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डाक्टरों की कमी से परेशान मरीज
- फोटो : अमर उजाला
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जिला महिला अस्पताल में शनिवार को महिला रोगियों की भीड़ उमड़ी। वहीं चिकित्सकों की कमी के चलते संविदा पर तैनात चिकित्सकों और रोगियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
उल्लेखनीय है कि जिला महिला अस्पताल में संविदा पर तीन महिला चिकित्सक तैनात हैं। इनमें से ही महिलाओं को इमरजेंसी भी देखनी होती है। साथ ही देहात में भी ड्यूटी लगानी होती है। वहीं सर्जन न होने के चलते सीजेरियन भी नहीं होता है। तैनात पुरुष सीएमएस डा. हरिदत्त नेगी जो बेहोशी के डाक्टर हैं। वह भी महिला रोगियों को देखते हैं। वहीं महिला अस्पताल में प्रतिदिन 400 से 500 रोगी इलाज को पहुंचते हैं। इसके चलते महिला चिकित्सकों के साथ-साथ रोगियाें को भी परेशानी होती है। कभी-कभी भीड़ अधिक होने के रोगी महिला डाक्टरों से भी झगड़ने लगते हैं। इसके चलते महिला चिकित्सक परेशान हैं।
विभागी सूत्रों की माने तो डाक्टरों का अटैचमेंट में अब समाप्त होने जा रहा है। इसके चलते संविदा पर तैनात महिला डाक्टरों को सीएचसी और पीएचसी पर भेजा जाएगा। इसके चलते फिर कौन रोगियों को देखेगा इसका पता किसी को नहीं है। वहीं सीएमएसए डा. हरिदत्त नेगी का कहना है कि वह कई चिकित्सकों की कमी केा शासन को लिख चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
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उल्लेखनीय है कि जिला महिला अस्पताल में संविदा पर तीन महिला चिकित्सक तैनात हैं। इनमें से ही महिलाओं को इमरजेंसी भी देखनी होती है। साथ ही देहात में भी ड्यूटी लगानी होती है। वहीं सर्जन न होने के चलते सीजेरियन भी नहीं होता है। तैनात पुरुष सीएमएस डा. हरिदत्त नेगी जो बेहोशी के डाक्टर हैं। वह भी महिला रोगियों को देखते हैं। वहीं महिला अस्पताल में प्रतिदिन 400 से 500 रोगी इलाज को पहुंचते हैं। इसके चलते महिला चिकित्सकों के साथ-साथ रोगियाें को भी परेशानी होती है। कभी-कभी भीड़ अधिक होने के रोगी महिला डाक्टरों से भी झगड़ने लगते हैं। इसके चलते महिला चिकित्सक परेशान हैं।
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विभागी सूत्रों की माने तो डाक्टरों का अटैचमेंट में अब समाप्त होने जा रहा है। इसके चलते संविदा पर तैनात महिला डाक्टरों को सीएचसी और पीएचसी पर भेजा जाएगा। इसके चलते फिर कौन रोगियों को देखेगा इसका पता किसी को नहीं है। वहीं सीएमएसए डा. हरिदत्त नेगी का कहना है कि वह कई चिकित्सकों की कमी केा शासन को लिख चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
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