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Mainpuri News: बचपन से ही देना चाहिए धर्म और आध्यात्म का ज्ञान
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फोटो 31 कुसराम के गांव धरमंगदपुर में आयोजित कथा में बोलते आचार्य प्रहलाद त्रिपाठी महाराज। संवाद
कुसमरा। क्षेत्र के गांव धरमंगदपुर स्थित शिव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य प्रहलाद त्रिपाठी महाराज ने कहा कि बच्चों को धर्म और आध्यात्म का ज्ञान बचपन से ही दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों को धर्म का ज्ञान बचपन में दिया जाता है, वह जीवन भर उसका ही स्मरण करता है। भक्त प्रह्लाद ने माता कयाधु के गर्भ में ही नारायण नाम का मंत्र सुना था। अच्छे संस्कारों के कारण ही ध्रुव जी को पांच वर्ष की आयु में भगवान का दर्शन प्राप्त हुआ। इससे पहले आलोक पांडेय, धनंजय पांडेय, रचित पांडेय ने व्यास पीठ का स्वागत किया। इस दौरान परीक्षित प्रेमनरायन मिश्रा, माधव दुबे, ललित पांडेय, गोपाल पाठक आदि मौजूद रहे।
भक्तों का उद्धार के लिए अवतरित हुए थे भगवान श्रीकृष्ण : किशनी। गांव बरिहार में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के चौथे दिन आचार्य सुरेश दास अवस्थी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्तों का उद्धार और पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त करने के लिए अवतार लिया था। अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी थी। कंस को उसकी सजा देने के लिए श्रीकृष्ण अवतरित हुए। आचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग और उनके जन्म लेने के गूढ़ रहस्य को बड़े ही सुंदर ढंग से बताया। नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की। लल्ला की सुन के मैं आई यशोदा मैया लल्ला की दे दो बधाई भजन जब सुनाया। संवाद
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उन्होंने कहा कि बच्चों को धर्म का ज्ञान बचपन में दिया जाता है, वह जीवन भर उसका ही स्मरण करता है। भक्त प्रह्लाद ने माता कयाधु के गर्भ में ही नारायण नाम का मंत्र सुना था। अच्छे संस्कारों के कारण ही ध्रुव जी को पांच वर्ष की आयु में भगवान का दर्शन प्राप्त हुआ। इससे पहले आलोक पांडेय, धनंजय पांडेय, रचित पांडेय ने व्यास पीठ का स्वागत किया। इस दौरान परीक्षित प्रेमनरायन मिश्रा, माधव दुबे, ललित पांडेय, गोपाल पाठक आदि मौजूद रहे।
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भक्तों का उद्धार के लिए अवतरित हुए थे भगवान श्रीकृष्ण : किशनी। गांव बरिहार में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के चौथे दिन आचार्य सुरेश दास अवस्थी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्तों का उद्धार और पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त करने के लिए अवतार लिया था। अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी थी। कंस को उसकी सजा देने के लिए श्रीकृष्ण अवतरित हुए। आचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग और उनके जन्म लेने के गूढ़ रहस्य को बड़े ही सुंदर ढंग से बताया। नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की। लल्ला की सुन के मैं आई यशोदा मैया लल्ला की दे दो बधाई भजन जब सुनाया। संवाद
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