{"_id":"6ad8faf1a93b7bcfd50696c8","slug":"mainpuri-news-hanuman-role-artist-mainpuri-news-c-174-1-mnp1002-169315-2026-10-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mainpuri News: धरती पर शयन, 40 दिन का कठोर व्रत और फिर बनते हैं हनुमान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mainpuri News: धरती पर शयन, 40 दिन का कठोर व्रत और फिर बनते हैं हनुमान
विज्ञापन
फोटो 15 वजनी मुकुट के साथ हनुमान जी का रूप धारण युवा और श्रद्धालु। संवाद
मैनपुरी। शहर में पांच दिनों तक आस्था, सेवा और कठिन साधना का अनूठा संगम देखने को मिलता है। हनुमान जी का रूप धारण से पहले युवा 40 दिन तक कठिन साधना करते हैं। मंदिर में धरती पर सोकर करते हैं आराधना। पंजाबी समाज की ओर से हर वर्ष हनुमान जी महाराज की शोभायात्रा का आयोजन किया जाता है।
पांच दशक से अधिक समय से चली आ रही इस परंपरा में युवा हनुमान जी का स्वरूप धारण कर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। वजनी मुकुट धारण कर निकलने वाले इन युवाओं के लिए यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बजरंगबली के प्रति समर्पण और सेवा का माध्यम है। इस वर्ष शोभायात्रा का 54वां आयोजन हो रहा है।
पंजाबी कॉलोनी गली नंबर सात स्थित बाबा रघुवीर दास मंदिर से शोभायात्रा की शुरुआत होती है। अष्टमी से शुरू होने वाली यह यात्रा लगातार पांच दिनों तक शहर के विभिन्न क्षेत्रों में निकाली जाती है। यात्रा के दौरान बैंड-बाजों की धुन पर श्रद्धालु झूमते हुए चलते हैं। हनुमान जी महाराज विभिन्न स्थानों पर रावण दहन करते हैं। आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश जुड़ता है।
विज्ञापन
शारीरिक बल और आध्यात्मिक अनुशासन का मुख्य हिस्सा है साधना
मंदिर के पुजारी पंडित मनीष शर्मा ने बताया कि स्वरूप धारण करने वाले युवाओं की तैयारी 40 दिन पहले शुरू होती है। इस दौरान युवा विशेष व्रत रखते हैं और नियमित रूप से पूजन करते हैं। साधना की अवधि में वे घर पर न रहकर मंदिर में ही रहते हैं और धरती पर सोते हैं। यह साधना उनके शारीरिक बल और आध्यात्मिक अनुशासन का मुख्य हिस्सा है।
विज्ञापन
पांच दशक से अधिक समय से चली आ रही इस परंपरा में युवा हनुमान जी का स्वरूप धारण कर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। वजनी मुकुट धारण कर निकलने वाले इन युवाओं के लिए यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बजरंगबली के प्रति समर्पण और सेवा का माध्यम है। इस वर्ष शोभायात्रा का 54वां आयोजन हो रहा है।
विज्ञापन
पंजाबी कॉलोनी गली नंबर सात स्थित बाबा रघुवीर दास मंदिर से शोभायात्रा की शुरुआत होती है। अष्टमी से शुरू होने वाली यह यात्रा लगातार पांच दिनों तक शहर के विभिन्न क्षेत्रों में निकाली जाती है। यात्रा के दौरान बैंड-बाजों की धुन पर श्रद्धालु झूमते हुए चलते हैं। हनुमान जी महाराज विभिन्न स्थानों पर रावण दहन करते हैं। आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश जुड़ता है।
विज्ञापन
शारीरिक बल और आध्यात्मिक अनुशासन का मुख्य हिस्सा है साधना
मंदिर के पुजारी पंडित मनीष शर्मा ने बताया कि स्वरूप धारण करने वाले युवाओं की तैयारी 40 दिन पहले शुरू होती है। इस दौरान युवा विशेष व्रत रखते हैं और नियमित रूप से पूजन करते हैं। साधना की अवधि में वे घर पर न रहकर मंदिर में ही रहते हैं और धरती पर सोते हैं। यह साधना उनके शारीरिक बल और आध्यात्मिक अनुशासन का मुख्य हिस्सा है।