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महिलाओं की सुरक्षा की चिंता करे, ऐसा हो विधायक

Sun, 15 Jan 2017 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी Updated Sun, 15 Jan 2017 11:17 PM IST
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mahilaon kee suraksha kee chinta kare, aisa ho vidhaayak
चुनावी मंथन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सपा का गढ़ होने के बाद भी जिले में आधी आबादी को सुरक्षा से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक के लिए तरसना पड़ रहा है। जिला कार्यालय में फोकस ग्रुप की बैठक में आम महिलाओं ने आधी आबादी से जुड़ी उन समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया जिनको अभी तक किसी ने भी तवज्जो नहीं दी है।
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वंदना चौहान का कहना है कि वीआईपी जिले में भी चिकित्सा सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है। जो सुविधाएं हैं उनका लाभ नहीं मिल रहा है। राजनीति में महिलाओं को जगह नहीं दी जा रही है।
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साधना अंबेश का कहना है कि विकास के बीच अपराध भी बढ़ा है। महिलाओं और छात्राओं को सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भर होना पड़ेगा। महिला अपराध करने वालों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए। जनप्रतिनिधियों को भी अपराधियों को संरक्षण नहीं देना चाहिए।
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मंजीत कौर का कहना है कि सरकारी नौकरी की तरह एमएलए, एमपी के लिए शैक्षिक योग्यता अनिवार्य की जानी चाहिए। साथ ही महिलाओं को उचित भागीदारी दी जानी चाहिए। राजनीतिक रूप से सक्रिय
महिलाओं को सत्ता में उचित भागीदारी मिलनी चाहिए। महिलाओं को घर से निकलकर वोट जरूर डालना चाहिए।

सोनम मिश्रा का कहना है कि विकास के नाम पर सड़क और बिजली ही नहीं शिक्षा के क्षेत्र में भी बदलाव होना चाहिए। तकनीकि और व्यवसायिक शिक्षा का विशेषकर लड़कियों के लिए उचित प्रबंध होना चाहिए। अगर सरकार ऐसा कर दे तो जिले की कई प्रतिभाएं निखर कर विभिन्न क्षेत्रों में नाम रोशन कर सकती हैं।
सरला चतुर्वेदी का कहना है कि जनप्रतिनिधि ऐसा हो जो जाति और धर्म से उठकर कार्य करे। शिक्षा की बदहाली रोकने के लिए योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए। कई सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं।
विमला दुबे का कहना है कि केवल लैपटॉप देने से भला नहीं हो सकता। रोजगार मुहैया कराने के लिए जनप्रतिनिधियों को पहल करनी होगी। बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए अभिभावकों को पहल करनी चाहिए।
डा. चाहत जौहरी का कहना है कि दुष्कर्म और महिला संबंधी अपराधों में पीड़िता को पुलिस उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। जो हेल्पलाइन नंबर चालू किए गए हैं, उन पर रेस्पोंस नहीं मिलता। जिससे अपराधी के हौसले बुलंद होते हैं। महिला अपराधों में जांच और पूछताछ के लिए महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी अनिवार्य की जानी चाहिए।
मृदुला अवस्थी का कहना है कि उच्च शिक्षा पाने के बाद भी युवतियां घर बैठने को विवश होती हैं। प्रितिभाशाली युवतियां हर क्षेत्र में महारथ हासिल कर सकती हैं। जिले के कई एमएलए, एमपी प्रदेश और केंद्र सरकार में मंत्री बने मगर जिले की बेरोजगारी दूर करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया।
डा. रश्मि जौहरी का कहना है जिले में निजी स्कूलों की संख्या तो अधिक है मगर शिक्षा का माहौल नहीं है। अप्रशिक्षित शिक्षकों से बच्चों का भविष्य बनाने की कोशिश की जा रही है। अगर बच्चों का भविष्य संवारना है तो शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव जरूरी है। इसके लिए सामाजिक पहल जरूरी है।

मलिका आलिया का कहना है कि महिला और छात्राओं की सुरक्षा सबसे बड़ी समस्या है। बालिका कालेजों के पास लगने वाले जमघट को कोई सरकार नहीं रोक पाई है। महिलाओं और युवतियों को खुद भी जागरूक होना होगा।
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