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वासना का अर्थ आस्था से दूर भागना
Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User
ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी
ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी
Published by: Anonymous User
Updated Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
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मैनपुरी। करहल रोड पर बड़ा दिगंबर जैन मंदिर स्थित संत निवास पर जैन मुनि श्री सुग्रंथ सागर महाराज ने कहा कि साधना पतित से पतित इंसान को भगवान बना देती है।
प्रवचन में जैन मुनि श्री सुग्रंथ सागर महाराज ने कहा कि वासना का अर्थ है आस्था से दूर भागना और साधना का अर्थ सत्य के निकट पहुंचना है। मुक्ति का एक मात्र द्वार धर्म है। मनोविकारों के चंगुल से छुटकर ही व्यक्ति वीतरागता को उपलब्ध हो सकता है। शरीर के तल पर जीने वाले लोग आत्मा का अनुभाव नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पुण्य और पाप एक की सिक्के के दो पहलू है। संपत्ति और विपत्ति पुण्य और पाप का विपाक है। इसलिए मनुष्य को पुण्योदय से प्राप्त कठिन परिस्थितियों में घबराना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि पाप किसी का सगा नहीं होता है और पुण्य किसी को दगा नहीं देता है।
मुनि श्री ने कहा कि वस्तु विकारी नहीं अपितु उसके प्रति अशक्तिपूर्ण विचार ही विकार को जन्म देते हैं। पानी में तैरने वाला सागर से पार हो जाता है लेकिन डूबने वाला वहीं मर जाता है। उन्होंने कहा कि जीवन प्रथम और मृत्यु सत्य है। उसके बाद भी इंसान समाज इस तरह जीता है जैसे समाज से उसका कोई संबंध ही नहीं है। जबकि हकीकत यह है कि मनुष्य वह इकाई है जिससे समाज का निर्माण होता है। इस मौके पर गौरव जैन, अभिषेक जैन, नितिन जैन, विशाल जैन, संजीव जैन, सुनील जैन, पंडित अनंन कुमार, अमन जैन, रिषभ जैन आदि मौजूद थे।
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प्रवचन में जैन मुनि श्री सुग्रंथ सागर महाराज ने कहा कि वासना का अर्थ है आस्था से दूर भागना और साधना का अर्थ सत्य के निकट पहुंचना है। मुक्ति का एक मात्र द्वार धर्म है। मनोविकारों के चंगुल से छुटकर ही व्यक्ति वीतरागता को उपलब्ध हो सकता है। शरीर के तल पर जीने वाले लोग आत्मा का अनुभाव नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पुण्य और पाप एक की सिक्के के दो पहलू है। संपत्ति और विपत्ति पुण्य और पाप का विपाक है। इसलिए मनुष्य को पुण्योदय से प्राप्त कठिन परिस्थितियों में घबराना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि पाप किसी का सगा नहीं होता है और पुण्य किसी को दगा नहीं देता है।
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मुनि श्री ने कहा कि वस्तु विकारी नहीं अपितु उसके प्रति अशक्तिपूर्ण विचार ही विकार को जन्म देते हैं। पानी में तैरने वाला सागर से पार हो जाता है लेकिन डूबने वाला वहीं मर जाता है। उन्होंने कहा कि जीवन प्रथम और मृत्यु सत्य है। उसके बाद भी इंसान समाज इस तरह जीता है जैसे समाज से उसका कोई संबंध ही नहीं है। जबकि हकीकत यह है कि मनुष्य वह इकाई है जिससे समाज का निर्माण होता है। इस मौके पर गौरव जैन, अभिषेक जैन, नितिन जैन, विशाल जैन, संजीव जैन, सुनील जैन, पंडित अनंन कुमार, अमन जैन, रिषभ जैन आदि मौजूद थे।
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