{"_id":"58cad65c4f1c1b741132d012","slug":"jel-mein-mahila-bandiyon-ka-yaun-shoshan","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेल में महिला बंदियों का यौन शोषण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जेल में महिला बंदियों का यौन शोषण
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Thu, 16 Mar 2017 11:46 PM IST
विज्ञापन
युवक का यौन शोषन
- फोटो : demo pics
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला कारागार से चार बंदियों के फरार होने की घटना के बाद जेल के भीतर के राज बाहर आ रहे हैं। इस मामले में निलंबित हुए जेलर और आरक्षी जेल अधीक्षक पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं तो वह चुप्पी साधे हुए हैं। आरक्षी छोटेलाल ने तो जेल बंद कुछ महिला बंदियों के यौन शोषण होने के आरोप लगाए हैं।
आरक्षी छोटे लाल का आरोप है कि कई बार जेल अधीक्षक महिला बैरक में अकेले ही जाते थे। छोटेलाल ने बताया कि बंदियों के भागने से छह माह पहले से जेल प्रशासन को आगाह किया जा रहा था। किसी अनहोनी को लेकर आरक्षियों ने जेल अधीक्षक को भी इसकी जानकारी दी थी। फोर्स की कमी के चलते होमगार्ड उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया था मगर कोई ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि यह आरोप सही है या गलत, यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन इससे यह तो साफ हो रहा है कि जेल में सब कुछ ठीक नहीं था। निलंबित जेलर सुरेश मिश्रा का कहना है कि कार्रवाई एक तरफा की गई है। जिस समय जेल अधीक्षक की जरूरत कारागार में थी वह घर पर ही थे। घर पर होने के बाद भी वह कारागार नहीं आए थे। घटना के दो दिन पहले से वह कारागर नहीं आ रहे थे। जेलर ने बताया कि कार्रवाई उन पर की गई मगर गणना की जानकारी व रिपोर्ट उन्हें नहीं दिखाई। जेल अधीक्षक ने घटना के बाद जेल रजिस्टर में अपनी हाजिरी दर्ज करा दी। यह बात सीसीटीवी फुटेज की जांच में साफ हो जाएगी। उन्होंने कहा कि एक तरफा कार्रवाई को लेकर वह उच्चाधिकारियों से लेकर शासन तक जाएंगे। वहीं इन आरोपों पर जेल अधीक्षक की ओर से अनभिज्ञता जताते हुए कोई भी टिप्पणी करने से इंकार किया जा रहा है।
विज्ञापन
आरक्षी छोटे लाल का आरोप है कि कई बार जेल अधीक्षक महिला बैरक में अकेले ही जाते थे। छोटेलाल ने बताया कि बंदियों के भागने से छह माह पहले से जेल प्रशासन को आगाह किया जा रहा था। किसी अनहोनी को लेकर आरक्षियों ने जेल अधीक्षक को भी इसकी जानकारी दी थी। फोर्स की कमी के चलते होमगार्ड उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया था मगर कोई ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि यह आरोप सही है या गलत, यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन इससे यह तो साफ हो रहा है कि जेल में सब कुछ ठीक नहीं था। निलंबित जेलर सुरेश मिश्रा का कहना है कि कार्रवाई एक तरफा की गई है। जिस समय जेल अधीक्षक की जरूरत कारागार में थी वह घर पर ही थे। घर पर होने के बाद भी वह कारागार नहीं आए थे। घटना के दो दिन पहले से वह कारागर नहीं आ रहे थे। जेलर ने बताया कि कार्रवाई उन पर की गई मगर गणना की जानकारी व रिपोर्ट उन्हें नहीं दिखाई। जेल अधीक्षक ने घटना के बाद जेल रजिस्टर में अपनी हाजिरी दर्ज करा दी। यह बात सीसीटीवी फुटेज की जांच में साफ हो जाएगी। उन्होंने कहा कि एक तरफा कार्रवाई को लेकर वह उच्चाधिकारियों से लेकर शासन तक जाएंगे। वहीं इन आरोपों पर जेल अधीक्षक की ओर से अनभिज्ञता जताते हुए कोई भी टिप्पणी करने से इंकार किया जा रहा है।
विज्ञापन