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जवाहर बाग में बंधक था पूरा परिवार

Sat, 04 Jun 2016 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी Updated Sat, 04 Jun 2016 11:43 PM IST
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Jawahar was in the garden of the family hostage
भर्ती - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
अलग से समानांतर सत्ता चलाने वाला रामवृक्ष यादव बाग में रहने वाले अपने समर्थक और मजदूरों का शोषण भी करता था। एक बार मथुरा के जवाहर बाग में जो प्रवेश कर गया, वह अपनी मर्जी से वहां से छोड़कर नहीं आ सकता था। जवाहर बाग में मजदूरी करने गए जिले के शमशेरगंज निवासी अजीत ने यह कहानी बयां की। पीड़ित ने बताया कि रामवृक्ष ने पूरे परिवार को बंधक बना लिया था। वह पूरे परिवार को वह एक साथ गांव नहीं आने देता था। यदि कभी गांव आने के लिए कहा जाए तो वह परिवार के एक या दो सदस्यों को जमानत के तौर पर जबरन रोक लेता था। 
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अजीत ने बताया कि उसके बाबा रामचंद्र कश्यप मथुरा मजदूरी करने गए थे। उन्हें जवाहर बाग में 2500 रुपये प्रतिमाह मजदूरी मिलती थी। जब छह माह बाद उन्होंने घर आने के लिए कहा तो रामवृक्ष यादव ने मना कर दिया। रामवृक्ष ने बाबा से कहा कि वह अपने परिवार को फोन से बुला लें तब जाने देंगे। इस पर बाबा ने हमारे पापा व मां और भाई बहन को बुला लिया। वहां से हम लोगों को कभी एक साथ घर नहीं आने दिया जाता था। जमानत के रूप में परिवार के कुछ लोगों को वह जवाहर बाग में ही रोक लेता था। हम लोगों से भंडारे काम कराया जाता था। पूरे परिवार को दस हजार रुपया प्रतिमाह दिया जाता था। रामवृक्ष यादव माह में एक बार बैठक जरूर करता था। इसमें रणनीति बनाई जाती थी। जवाहर बाग में रहने वाले बच्चों के लिए पढ़ने की भी व्यवस्था की गई थी, जहां पर वहां काम करने वाले लोगों के करीब 260 बच्चे पढ़ते थे। रामवृक्ष यादव को लोग नेताजी के नाम से बुलाते थे। अजित ने यह भी बताया कि पिछले कुछ दिनों से जवाहर बाग में रहने वाला व्यक्ति बाहर जाने की कहता था तो डराया जाता था कि पुलिस पकड़ लेगी। बवाल की शाम को वह बड़ी मुश्किल से जवाहर बाग से बाहर निकले। मथुरा से आगरा के लिए ट्रेन पकड़ी, वहां से रात ढाई बजे इटावा पहुंचे।ेेेेेे
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सोशल मीडिया पर चल रहे फोटो को देख पहचाना मां को
शनिवार को सोशल मीडिया पर एक घायल महिला की फोटो वायरल हुई थी। उक्त फोटो को दिखाने पर उसके आंसू छलक आए। उसने बताया कि यही महिला उसकी मां सुमन है। वह कहां भर्ती यह पूछने पर उसने कहा कि शमशेरगंज से दादा, पापा और कई लोग उन्हें तलाशने गए हैं लेकिन उन्हें भी इसकी जानकारी नहीं है कि मां कहां पर भर्ती हैं। 
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नगला दनू के दो लोग और गायब
थाना क्षेत्र के नगला दनू के श्रीकृष्ण पुत्र अमान सिंह उम्र 62 वर्ष को भी परिवारीजन तलाश नहीं कर सके हैं। श्रीकृष्ण के पुत्र सरजू कांत का कहना है कि मेरे पिता होली से चार दिन पूर्व जवाहर बाग में मजदूरी करने गए थे तब से वापस नहीं आए। फोन पर पिछले रविवार व बुधवार को बात हुई थी। तब वह वापस आने की कह रहे थे। बवाल के बाद से अभी तक कोई पता नही है। पिताजी के साथ गांव के जयप्रकाश जाटव पुत्र पूरन लाल भी गए थे उनका भी कोई पता नहीं मिल रहा है।
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