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यहां तो अब भी टिमटिमाती है ढिबरी, ये है किशनी
सोनम वारसी
Updated Sun, 12 Feb 2017 12:03 AM IST
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यहां तो अब भी टिमटिमाती है ढिबरी, ये है किशनी
- फोटो : अमर उजाला
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किशनी विधानसभा भी दशकों से पिछड़ेपन का दंश झेल रही है। क्षेत्र में न तो विकास कहीं दिखाई पड़ता है और न ही शिक्षा का ही कोई स्तर है। रोजगार की बात ही करना बेमानी है। यह स्थिति तब है जबकि पिछले 25 सालों से यह सीट सपा के ही कब्जे में रही है।
किशनी सीट वर्तमान विधानसभा चुनावों में सुरक्षित सीट है। इस विधानसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा मुद्दा विकास न होना है। बड़ी संख्या में यहां के गांवों में जाने के लिए पहुंच मार्ग तक नहीं बने हैं। बिजली की भी यही स्थिति है। यहां के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों में अभी तक दिन ढलने के बाद रोशनी का एकमात्र सहारा ढिबरी ही है। कुछ संपन्न लोगों ने अपने यहां जरूर सौर ऊर्जा की लाइट लगवा रखी हैं। यह स्थिति तब है जबकि यहां पर 1993 से लगातार सपा के ही विधायक बन रहे हैं। इस विधानसभा में पहली बार 1962 में चुनाव हुआ था। यहां के लोगों का कहना है कि हर चुनाव में प्रत्याशी आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं। उसके बाद कोई नहीं आता है। विकास की बदतर स्थिति तब है जबकि किशनी विधानसभा के बीच से बरेली-ग्वालियर हाईवे निकल रहा है। यही नहीं यहां पर शेगनाथ मेला लगता है जिसमें पूरे उत्तर प्रदेश से लोग आते हैं।
क्षेत्र निवासी अमित कुमार, सोनू व दिलीप सिंह का कहना है कि क्षेत्र में पिछले 27 साल पहले समान पक्षी विहार बनाया गया था। लोगों को उम्मीद बंधी थी कि अब उनकी किस्मत बदल जाएगी। पर्यटक आने से रोजगार बढे़गा और क्षेत्र का विकास होगा। हुआ उलटा रोजगार तो दूर 27 सालों में पक्षी विहार के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन का मुआवजा तक लोगों को नहीं मिला। उनको विस्थापित करने तक की व्यवस्था प्रदेश सरकार ने नहीं की। इसके चलते आए दिन वहां पर आंदोलन होते हैं। इसके बाद भी समस्या जस की तस है। यही कारण है कि लोगों में काफी आक्रोश है। इस विधानसभा की सीमाएं तीन जिलों से लगती है। इनमें फर्रुखाबाद, कन्नौज और इटावा शामिल हैं।
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वर्तमान में प्रत्याशी
ब्रजेश कठेरिया सपा
कमलेश कुमारी बसपा
सुनील कुमार भाजपा
गिरीश कुमार लोकदल
नेत्रपाल सुभाष सेना
मीरा फौजी जनता पार्टी
सुमन दिवाकर जन अधिकार मंच
अखिलेश निर्दलीय
आशीष निगम निर्दलीय
नाथूराम निर्दलीय
लीना सिंह निर्दलीय
विधानसभा में अब तक चुने गए विधायक
गणेश चंद्र कांग्रेस 1962
एसआर सिंह सोशलिस्ट पार्टी 1967
शिवख्श राठौर कांग्रेस 1969
मुंशीलाल कांग्रेस 1974
हाकिमलाल जनता पार्टी 1977
मुंशीलाल कांग्रेस 1980
राम सिंह कांग्रेस 1985
रामेश्वर दयाल जनता दल 1989
रामेश्वर दयाल सपा 1993
रामेश्वर दयाल सपा 1996
संध्या कठेरिया सपा 2002
संध्या कठेरिया सपा 2007
ब्रजेश कठेरिया सपा 2012
मतदाताओं की संख्या
कुल मतदाता 297428
पुरुष मतदाता 161336
महिला मतदाता 13607
उम्मीदवारों का एजेंडा
सपा प्रत्याशी ब्रेजश कठेरिया
- क्षेत्र का विकास कराना
- युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना
- समान पक्षी विहार के विस्थापितों को मुआवजा दिलाना
भाजपा प्रत्याशी: सुनील जाटव
- गुंडागर्दी, लूटपाट पर रोक लगाना
- क्षेत्र में अशिक्षा का बढ़ता स्तर
- महिलाओं की सुरक्षा के उपाय करना
- स्वास्थ्य सेवाओं का विकास करना
बसपा प्रत्याशी: कमेलश कुमारी
- किशनी के सर्व समाज को गुंडाराज से मुक्ति दिलाना
- विकास युक्त, भयमुक्त समाज की स्थापना
- शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए उपाय करना
- जन अधिकार मंच: सुमन दिवाकर
- महिला सुरक्षा का विशेष प्रबंध
- महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना
- लड़कियों को शिक्षा व अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करना
प्रमुख क्षेत्र
- समान पक्षी विहार
- शेगनाथ मंदिर
- बरेली-ग्वालियर राजमार्ग भी गुजरता है
- तीन जिलों की सीमाएं जुड़ती हैं।
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किशनी सीट वर्तमान विधानसभा चुनावों में सुरक्षित सीट है। इस विधानसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा मुद्दा विकास न होना है। बड़ी संख्या में यहां के गांवों में जाने के लिए पहुंच मार्ग तक नहीं बने हैं। बिजली की भी यही स्थिति है। यहां के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों में अभी तक दिन ढलने के बाद रोशनी का एकमात्र सहारा ढिबरी ही है। कुछ संपन्न लोगों ने अपने यहां जरूर सौर ऊर्जा की लाइट लगवा रखी हैं। यह स्थिति तब है जबकि यहां पर 1993 से लगातार सपा के ही विधायक बन रहे हैं। इस विधानसभा में पहली बार 1962 में चुनाव हुआ था। यहां के लोगों का कहना है कि हर चुनाव में प्रत्याशी आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं। उसके बाद कोई नहीं आता है। विकास की बदतर स्थिति तब है जबकि किशनी विधानसभा के बीच से बरेली-ग्वालियर हाईवे निकल रहा है। यही नहीं यहां पर शेगनाथ मेला लगता है जिसमें पूरे उत्तर प्रदेश से लोग आते हैं।
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क्षेत्र निवासी अमित कुमार, सोनू व दिलीप सिंह का कहना है कि क्षेत्र में पिछले 27 साल पहले समान पक्षी विहार बनाया गया था। लोगों को उम्मीद बंधी थी कि अब उनकी किस्मत बदल जाएगी। पर्यटक आने से रोजगार बढे़गा और क्षेत्र का विकास होगा। हुआ उलटा रोजगार तो दूर 27 सालों में पक्षी विहार के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन का मुआवजा तक लोगों को नहीं मिला। उनको विस्थापित करने तक की व्यवस्था प्रदेश सरकार ने नहीं की। इसके चलते आए दिन वहां पर आंदोलन होते हैं। इसके बाद भी समस्या जस की तस है। यही कारण है कि लोगों में काफी आक्रोश है। इस विधानसभा की सीमाएं तीन जिलों से लगती है। इनमें फर्रुखाबाद, कन्नौज और इटावा शामिल हैं।
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वर्तमान में प्रत्याशी
ब्रजेश कठेरिया सपा
कमलेश कुमारी बसपा
सुनील कुमार भाजपा
गिरीश कुमार लोकदल
नेत्रपाल सुभाष सेना
मीरा फौजी जनता पार्टी
सुमन दिवाकर जन अधिकार मंच
अखिलेश निर्दलीय
आशीष निगम निर्दलीय
नाथूराम निर्दलीय
लीना सिंह निर्दलीय
विधानसभा में अब तक चुने गए विधायक
गणेश चंद्र कांग्रेस 1962
एसआर सिंह सोशलिस्ट पार्टी 1967
शिवख्श राठौर कांग्रेस 1969
मुंशीलाल कांग्रेस 1974
हाकिमलाल जनता पार्टी 1977
मुंशीलाल कांग्रेस 1980
राम सिंह कांग्रेस 1985
रामेश्वर दयाल जनता दल 1989
रामेश्वर दयाल सपा 1993
रामेश्वर दयाल सपा 1996
संध्या कठेरिया सपा 2002
संध्या कठेरिया सपा 2007
ब्रजेश कठेरिया सपा 2012
मतदाताओं की संख्या
कुल मतदाता 297428
पुरुष मतदाता 161336
महिला मतदाता 13607
उम्मीदवारों का एजेंडा
सपा प्रत्याशी ब्रेजश कठेरिया
- क्षेत्र का विकास कराना
- युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना
- समान पक्षी विहार के विस्थापितों को मुआवजा दिलाना
भाजपा प्रत्याशी: सुनील जाटव
- गुंडागर्दी, लूटपाट पर रोक लगाना
- क्षेत्र में अशिक्षा का बढ़ता स्तर
- महिलाओं की सुरक्षा के उपाय करना
- स्वास्थ्य सेवाओं का विकास करना
बसपा प्रत्याशी: कमेलश कुमारी
- किशनी के सर्व समाज को गुंडाराज से मुक्ति दिलाना
- विकास युक्त, भयमुक्त समाज की स्थापना
- शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए उपाय करना
- जन अधिकार मंच: सुमन दिवाकर
- महिला सुरक्षा का विशेष प्रबंध
- महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना
- लड़कियों को शिक्षा व अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करना
प्रमुख क्षेत्र
- समान पक्षी विहार
- शेगनाथ मंदिर
- बरेली-ग्वालियर राजमार्ग भी गुजरता है
- तीन जिलों की सीमाएं जुड़ती हैं।