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आध्यात्म की शक्ति से भारत बनेगा विश्व गुरु
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Sat, 15 Oct 2016 11:52 PM IST
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सद्भावना सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आज समाज को बदलने के लिए हमें पेड़ों को बदलने की जरूरत नहीं है। आकाश, धरती, अगिभन, जल, वायु भी बदलने की जरूरत नहीं है। जरूरत है मानव के मन और विचारों को बदलने की। मानव का मन और विचार आध्यात्मिक ज्ञान से ही बदले जा सकते हैं। यह कहना है कि पूर्व सांसद तथा धर्मगुरु सतपाल महाराज का।
शनिवार को आध्यात्मिक संस्था मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कालेज करहल रोड पर दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन के पहले दिन प्रवचन करते हुए उन्हाेंने कहा कि आध्यात्म को जानकर जब हम बदलेंगे तभी हजारों परिवार, गांव शहर, देश और विश्व भी बदलेगा। आध्यात्म और सद्भावना की शक्ति से भारत पहले ही संसार का सिरमौर था। आध्यात्म की शक्ति से विश्व गुरु बन सकता है।
उन्होंने कहा कि अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर आध्यात्म और सद्भावना की ज्योति जलाएं तभी समाज में व्याप्त अज्ञानता और दुर्भावना को दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि महापुरुष व्यक्ति को कायर नहीं महावीर बनाते हैं। जरूरत है उनकी शिक्षाओं को आत्मसात करने की। महापुरुषों के संदेश और शिक्षाओं को भुलाने से ही समाज में चारों ओर आतंकवाद, हिंसा, भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता और उग्रवाद बढ़ रहा है। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
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शनिवार को आध्यात्मिक संस्था मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कालेज करहल रोड पर दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन के पहले दिन प्रवचन करते हुए उन्हाेंने कहा कि आध्यात्म को जानकर जब हम बदलेंगे तभी हजारों परिवार, गांव शहर, देश और विश्व भी बदलेगा। आध्यात्म और सद्भावना की शक्ति से भारत पहले ही संसार का सिरमौर था। आध्यात्म की शक्ति से विश्व गुरु बन सकता है।
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उन्होंने कहा कि अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर आध्यात्म और सद्भावना की ज्योति जलाएं तभी समाज में व्याप्त अज्ञानता और दुर्भावना को दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि महापुरुष व्यक्ति को कायर नहीं महावीर बनाते हैं। जरूरत है उनकी शिक्षाओं को आत्मसात करने की। महापुरुषों के संदेश और शिक्षाओं को भुलाने से ही समाज में चारों ओर आतंकवाद, हिंसा, भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता और उग्रवाद बढ़ रहा है। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
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