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विचारों को सदा पवित्र रखें:गोपालदास महाराज
Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User
ब्यूरो अमर उजाला मैनपुरी
ब्यूरो अमर उजाला मैनपुरी
Published by: Anonymous User
Updated Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
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कुरावली। ग्राम ढिवैया स्थित गमादेवी मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान वृंदावन के आचार्य गोपालदास महाराज ने कहा कि मनुष्य को सदा विचारों को स्वच्छ एवं पवित्र रखना चाहिए। इससे उसका मन भी पवित्र होगा और वह सदाचरण करने लगेगा।
आचार्य ने बताया कि भगवान कृष्ण की समाज के लिए दी शिक्षा को गीता में संकलित किया गया है। गीता का एक-एक श्लोक जीवन जीने की कला सिखाता है। गीता में कहा गया है कि आत्मा न मरती है और न ही जन्म लेती है। मरता तो केवल शरीर है, आत्मा अजर अमर है। जब आत्मा अजर अमर है तो शरीर से मोह कैसा, भगवान कृष्ण कहते हैं कि जीव को मोह-माया त्यागकर अपने कर्त्तव्य का पालन करना चाहिए। मनुष्य का जीवन 84 लाख योनियों के बाद मिलता है। फिर भी इसको मनुष्य व्यर्थ में गंवा रहा है। प्रभु के स्मरण मात्र से ही मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं यदि प्रभु का स्मरण आत्मा से किया जाए। इस मौके पर यज्ञाचार्य मुनि महाराज, परीक्षित लल्लू सिंह, रामबहादुर बाथम, सौरभ राठौर, श्यामवीर, दीपू, वीरेंद्र, पप्पू, राजू राठौर, रनवीर सिंह, हरविलास, योगेंद्र, नरेंद्र, रीतू सिंह, अंशिका, शशि, सुभाष आदि मौजूद रहे।
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आचार्य ने बताया कि भगवान कृष्ण की समाज के लिए दी शिक्षा को गीता में संकलित किया गया है। गीता का एक-एक श्लोक जीवन जीने की कला सिखाता है। गीता में कहा गया है कि आत्मा न मरती है और न ही जन्म लेती है। मरता तो केवल शरीर है, आत्मा अजर अमर है। जब आत्मा अजर अमर है तो शरीर से मोह कैसा, भगवान कृष्ण कहते हैं कि जीव को मोह-माया त्यागकर अपने कर्त्तव्य का पालन करना चाहिए। मनुष्य का जीवन 84 लाख योनियों के बाद मिलता है। फिर भी इसको मनुष्य व्यर्थ में गंवा रहा है। प्रभु के स्मरण मात्र से ही मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं यदि प्रभु का स्मरण आत्मा से किया जाए। इस मौके पर यज्ञाचार्य मुनि महाराज, परीक्षित लल्लू सिंह, रामबहादुर बाथम, सौरभ राठौर, श्यामवीर, दीपू, वीरेंद्र, पप्पू, राजू राठौर, रनवीर सिंह, हरविलास, योगेंद्र, नरेंद्र, रीतू सिंह, अंशिका, शशि, सुभाष आदि मौजूद रहे।
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