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जेल की जगह जिंदगी से ही मिल गई रिहाई
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Tue, 23 Aug 2016 11:47 PM IST
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जेल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हाईकोर्ट के आदेश पर जेल से रिहाई होने से पहले ही दीवानी हवालात में मंगलवार को बिरजू गिहार की जिंदगी से ही रिहाई हो गई। मोर मारने के आरोप में एक साल से जेल में बंद बिरजू को जमानत मिलने के बाद घर जाने का इंतजार था। उसकी पत्नी सरिता जमानतदारों की व्यवस्था कर रही थी। पत्नी को तब बड़ा झटका लगा जब उसे पता चला कि बिरजू की दीवानी हवालात में मौत हो चुकी
है। दीवानी पहुंची सरिता का रो रोकर बुरा हाल था।
थाना दन्नाहार पुलिस ने 20 अगस्त 2015 को बिरजू तथा उसके भाई बीरू को गडरियान तिराहे के पास से मरे हुए मोर के साथ पकड़कर जेल भेजा था। पुलिस ने इस मुकदमे में चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल कर दी है। इस मुकदमे की कोर्ट में सुनवाई चल रही है। बिरजू की पत्नी सरिता और पिता बारेलाल मुकदमे में पैरवी करते हैं। जिला जज की कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद सरिता ने हाईकोर्ट में जमानत पाने के लिए आवेदन किया। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा ने 29 मार्च 2016 को बिरजू की जमानत मंजूर कर ली थी। हाईकोर्ट का आदेश पत्नी को मिल चुका था। जमानतदारों की व्यवस्था करने में वह जुटी थी। मंगलवार को जमानत भरवाने के लिए उसने अपने वकील सुभाषचंद्र शाक्य से समय भी मांगा था। उसे क्या पता था कि जेल से रिहाई की जगह उसके पति की जिंदगी से ही रिहाई होगी। बिरजू जिंदा नहीं उसका शव ही घर आएगा। परिवारीजनों का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही से बिरजू की मौत हुई है। बिरजू की मौत की वजह क्या है यह तो पोस्टमार्टम के बाद ही पता चलेगा। लेकिन तब तक नगर में अफवाहों का बाजार गर्म है।
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है। दीवानी पहुंची सरिता का रो रोकर बुरा हाल था।
थाना दन्नाहार पुलिस ने 20 अगस्त 2015 को बिरजू तथा उसके भाई बीरू को गडरियान तिराहे के पास से मरे हुए मोर के साथ पकड़कर जेल भेजा था। पुलिस ने इस मुकदमे में चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल कर दी है। इस मुकदमे की कोर्ट में सुनवाई चल रही है। बिरजू की पत्नी सरिता और पिता बारेलाल मुकदमे में पैरवी करते हैं। जिला जज की कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद सरिता ने हाईकोर्ट में जमानत पाने के लिए आवेदन किया। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा ने 29 मार्च 2016 को बिरजू की जमानत मंजूर कर ली थी। हाईकोर्ट का आदेश पत्नी को मिल चुका था। जमानतदारों की व्यवस्था करने में वह जुटी थी। मंगलवार को जमानत भरवाने के लिए उसने अपने वकील सुभाषचंद्र शाक्य से समय भी मांगा था। उसे क्या पता था कि जेल से रिहाई की जगह उसके पति की जिंदगी से ही रिहाई होगी। बिरजू जिंदा नहीं उसका शव ही घर आएगा। परिवारीजनों का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही से बिरजू की मौत हुई है। बिरजू की मौत की वजह क्या है यह तो पोस्टमार्टम के बाद ही पता चलेगा। लेकिन तब तक नगर में अफवाहों का बाजार गर्म है।
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