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शास्त्रों में लिखी बातों को मन में उतारें
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Thu, 09 Feb 2017 11:29 PM IST
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शास्त्रों में लिखी बातों को मन में उतारें
- फोटो : अमर उजाला
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कचहरी रोड स्थित कबीर आश्रम पर छठवें दिन ध्यान शिविर एवं माघी संत सेवा सत्संग समारोह का गुरुवार को संतों के प्रवचन के साथ समापन हो गया। साधकों ने संतों को सम्मानित कर उनका आशीर्वाद लिया। संतों ने अपने प्रवचनों में गुरु की गरिमा और महत्ता का संदेश दिया।
आश्रम पर प्रवचन में महंत अमर साहेब ने कहा कि सिर्फ शास्त्रों को पढ़ने से ही ज्ञान की प्राप्ति नहीं होती। असली विद्वान तो वही हैं जो शास्त्रों में लिखी बातों को अपने मन में उतारें। ध्यान वहीं सिद्ध होता है जिसके माध्यम से हम अपनी इंद्रियों को वश में करके संपूर्ण ध्यान ईश्वर की आराधना में लगाएं। सांप्रदायिक ताकतों को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि कुछ सांप्रदायिक लोग हमारी भावनाओं को भड़काते हैं। धर्म और संप्रदाय के नाम पर हमें आपस में लड़ाते हैं और हम एक-दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं। यह अज्ञानता के कारण होता है।
सत्संग और समागम में शामिल होकर हम यह शिक्षा प्राप्त करते हैं कि ईश्वर एक ही है। सिर्फ उनके स्वरूपों में भिन्नता है, लेकिन इस सत्य को स्वीकारने की बजाय हम उसे भुलाकर निजी स्वार्थ में लग जाते हैं। हमें सांप्रदायिक ताकतों को हराकर मानवता की स्थापना के लिए प्रयास करने होंगे।
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अंतिम दिन गैर प्रांतों से आए संतों ने साधकों को मानवता का संदेश देते हुए उन्हें सत्य की राह पर चलने की शपथ दिलाई। साधकों ने गुरुओं का माल्यार्पण कर सम्मान किया। शुक्रवार को प्रवचन के बाद दोपहर बाद भंडारे का आयोजन होगा।
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आश्रम पर प्रवचन में महंत अमर साहेब ने कहा कि सिर्फ शास्त्रों को पढ़ने से ही ज्ञान की प्राप्ति नहीं होती। असली विद्वान तो वही हैं जो शास्त्रों में लिखी बातों को अपने मन में उतारें। ध्यान वहीं सिद्ध होता है जिसके माध्यम से हम अपनी इंद्रियों को वश में करके संपूर्ण ध्यान ईश्वर की आराधना में लगाएं। सांप्रदायिक ताकतों को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि कुछ सांप्रदायिक लोग हमारी भावनाओं को भड़काते हैं। धर्म और संप्रदाय के नाम पर हमें आपस में लड़ाते हैं और हम एक-दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं। यह अज्ञानता के कारण होता है।
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सत्संग और समागम में शामिल होकर हम यह शिक्षा प्राप्त करते हैं कि ईश्वर एक ही है। सिर्फ उनके स्वरूपों में भिन्नता है, लेकिन इस सत्य को स्वीकारने की बजाय हम उसे भुलाकर निजी स्वार्थ में लग जाते हैं। हमें सांप्रदायिक ताकतों को हराकर मानवता की स्थापना के लिए प्रयास करने होंगे।
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अंतिम दिन गैर प्रांतों से आए संतों ने साधकों को मानवता का संदेश देते हुए उन्हें सत्य की राह पर चलने की शपथ दिलाई। साधकों ने गुरुओं का माल्यार्पण कर सम्मान किया। शुक्रवार को प्रवचन के बाद दोपहर बाद भंडारे का आयोजन होगा।