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Mainpuri News: हर माह कुत्ते और बंदर 900 लोगों पर कर रहे हमला

Sun, 27 Sep 2026 11:36 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2026 11:36 PM IST
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Dogs and monkeys are attacking 900 people every month.
फोटो 8 महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल। संवाद
मैनपुरी। लोगों में रेबीज का खतरा बढ़ रहा है। कुत्ता, बिल्ली और बंदर के काटने से घायल मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से लेकर अब तक 8200 लोगों को एंटी रेबीज का उपचार दिया जा चुका है।
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कुत्ता, बंदर और बिल्ली के हमले का लोग शिकार हो रहे हैं। जिले में प्रतिमाह लगभग 900 लोगों को एंटी रेबीज का टीका लगाया जा रहा है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 300 से 400 लोग एंटी रेबीज के लिए पहुंचते हैं। सीएमएस डॉ. राज सिंह बताते हैं कि रेबीज की रोकथाम के लिए तो एंटी रेबीज है लेकिन रेबीज एक बार यदि किसी मनुष्य के शरीर में फैल गया तो उसका कोई उपचार नहीं होता है।
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नौ महीने के आंकड़े

बंदरों के हमले से घायल - 5430

कुत्तों के हमले से घायल- 2735

बिल्लियों के हमले से घायल - 35

रेबीज लक्षण

जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राज सिंह बताते हैं कि रेबीज न्यूरो-इनवेसिव वायरल बीमारी होने के कारण पीड़ित व्यक्ति सामान्य नहीं रह पाता। मरीज को शुरू के एक-दो दिन में बुखार, भूख न लगना, कमजोरी और चिड़चिड़ापन की समस्या होने लगती है। मरीज कोमा में भी जा सकता है।
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ऐसे फैलता है रेबीज

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. गौरव पारिक बताते हैं कि रेबीज की बीमारी कुत्ते, बिल्ली, बंदर, चमगादड़, गाय-भैंस, चूहों, लोमड़ी, भेड़िया जैसे जानवरों के काटने से होती है। जिले में ज्यादातर रेबीज के मामले कुत्ते या बंदर के काटने के हैं। उन्होंने बताया कि रेबीज लायसा न्यूरोट्रॉपिक वायरस के संक्रमण से होती है। ये वायरस वॉर्म ब्लडेड स्तनधारी जीवों को आसानी से अपना शिकार बनाते हैं। जब रेबीज वायरस से ग्रसित जानवर किसी अन्य जानवर को काटता है, तब ये वायरस उसके लार के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

बचाव के उपाय

रेबीज से पीड़ित जानवर काटे, तो सबसे पहले जख्म को साबुन और नल के बहते पानी से 10-15 मिनट तक लगातार धोएं।

डिटॉल, आयोडीन एंटीसेप्टिक या आफ्टर शेव से अच्छी तरह साफ कर लें।

मरीज को नजदीकी हॉस्पिटल या डॉक्टर के पास जाएं।

20 से 24 घंटे के भीतर वैक्सीनेशन जरूर कराना चाहिए।
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