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UP: घोड़ों में इस खतरनाक बीमारी का खतरा...संक्रमित होने पर देनी पड़ती है माैत, इंसानों के लिए भी जानलेवा

Wed, 11 Jun 2025 07:49 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी Published by: अरुन पाराशर Updated Wed, 11 Jun 2025 07:49 PM IST
सार

घोड़ों में संक्रमित बीमारी फैल रही है। ये पशुओं से मानव में तुरंत फैलती है। नमूना लेते समय इसमें विशेष सावधानी बरती जाती है। 
 

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Danger glanders and Persian infection spread in horses
घोड़ा। - फोटो : iStock

विस्तार

घोड़ों में ग्लैंडर्स व फारसी संक्रमण रोग फैलने के खतरे को देखते हुए जिले में पशुपालन विभाग भी अलर्ट हो गया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के निर्देश पर जिले भर से घोड़े, टट्टुओं के 30 सैंपल जांच के लिए हरियाणा के हिसार भेजे गए हैं। पशु पालकों से सतर्कता बरतते हुए संक्रमित पशुओं से दूरी बनाए रखने की अपील की है।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. सोमदत्त सिंह ने बताया कि ग्लैंडर्स व फारसी का संक्रमण घोड़ों की प्रजाति में होता है। विशेष रूप से खच्चर और गधों में इसके लक्षण अधिक पाए जाते हैं। ऐसे में स्वस्थ पशुओं को इनसे तुरंत दूर रखें। बताया कि जिले में वर्तमान में घोड़ों और टट्टुओं की संख्या 985 है। 
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि टीमों को निरीक्षण कर सैंपल लिए जाने व पशु पालकों को बीमारी को लेकर जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। अश्व पालकों को अगर अपने पशु में इसके लक्षण नजर आएं तो तुरंत सूचना दें। ताकि समय रहते सैंपल लिए जाने की प्रक्रिया पूरी की जा सके। जिले से अभी तक 30 अश्व के सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं।

इंसान को भी है खतरा, तेजी से फैलता है संक्रमण
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि यह संक्रमित बीमारी है और पशुओं से मानव में तुरंत फैलती है। नमूना लेते समय इसमें विशेष सावधानी बरती जाती है। अन्यथा यह बीमारी अश्व से मानव में फैल सकती है। दूसरे स्वस्थ पशुओं को इनसे अलग रखा जाता है नहीं तो वह भी संक्रमित हो सकते हैं।

संक्रमित पशु को मारना ही है अंतिम उपचार
इस बीमारी से ग्रसित होने पर रिपोर्ट जांच के लिए भेजी जाती है। सीरम-सैंपल पॉजीटिव आने पर घोड़ों को मारकर दफनाया जाता है। घोड़ों के लिए क्षतिपूर्ति 25 हजार रुपये और गधा व खच्चर के लिए 16 हजार रुपये दिए जाते हैं।
 
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