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कहीं बच्चे कम तो कहीं यूनिफार्म-किताबों का टोटा
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Sat, 16 Jul 2016 11:47 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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परिषदीय स्कूल खुले 15 दिन बीत गए, लेकिन अभी तक पढ़ाई का माहौल नहीं बना है। कहीं बच्चे कम आ रहे हैं तो कहीं बच्चों पर यूनिफार्म और किताबें नहीं हैं। इससे अभी तक पढ़ाई ढर्रे पर नहीं आ सकी है। शनिवार को जब अमर उजाला की टीम ने नगर के परिषदीय स्कूलों का जायजा लिया तो हकीकत सामने आई।
सीबीएसई की तर्ज पर परिषदीय विद्यालयों में नया शैक्षिक शुरू तो हो गया, लेकिन उसके बाद भी पुराने ढर्रे पर शिक्षक और बच्चे नजर आए। उपस्थिति पंजिका में तो बच्चों की अच्छी खासी संख्या दर्ज दिखाई गई थी, लेकिन मौके पर गिने-चुने बच्चे ही दिखाई दिए। वहीं प्रभारी बीएसए भारती शाक्य का कहना है कि सभी को दिशा-निर्देश जारी दिए गए हैं। विद्यालयों में विधिवत पढ़ाई कराई जाए। फिर भी यदि ऐसा है तो वह स्वयं निरीक्षण कर कार्रवाई करेंगे।
दृश्य: एक
पुरोहिताना स्थित प्राथमिक विद्यालय में मौके पर मात्र 16 बच्चे उपस्थित थे। बच्चे पढ़ाई तो कर रहे थे, लेकिन उनके हाथों में पुरानी किताबें थीं। कारण अभी तक विभाग द्वारा नई किताबें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
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दृश्य: दो
प्राथमिक विद्यालय नगरिया में काफी कम बच्चे उपस्थित थे। पढ़ने की बजाए स्कूल के गेट पर हुए जलभराव में आ जा रह थे। इससे साफ नजर आया कि बच्चे खेलने में मशगूल थे।
दृश्य: तीन
प्राथमिक विद्यालय भरतवाल जलभराव के चलते स्कूल नहीं तालाब जैसा नजर आ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि जलभराव के चलते आने-जाने में काफी परेशानी होती है। इसके चलते बच्चे कम ही आते हैं।
दृश्य: चार
प्राथमिक विद्यालय नगला पजाबा का हाल बेहाल है। यहां विद्यालय परिसर में बंधी भैंस के चलते गंदगी का अंबार लगा है। इस स्कूल को देखकर ही नहीं लगता है कि यह स्कूल है तो पढ़ाई का क्या माहौल होगा स्वयं अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं बच्चे भी बिना यूनिफार्म पहने आ रहे हैं।
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सीबीएसई की तर्ज पर परिषदीय विद्यालयों में नया शैक्षिक शुरू तो हो गया, लेकिन उसके बाद भी पुराने ढर्रे पर शिक्षक और बच्चे नजर आए। उपस्थिति पंजिका में तो बच्चों की अच्छी खासी संख्या दर्ज दिखाई गई थी, लेकिन मौके पर गिने-चुने बच्चे ही दिखाई दिए। वहीं प्रभारी बीएसए भारती शाक्य का कहना है कि सभी को दिशा-निर्देश जारी दिए गए हैं। विद्यालयों में विधिवत पढ़ाई कराई जाए। फिर भी यदि ऐसा है तो वह स्वयं निरीक्षण कर कार्रवाई करेंगे।
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दृश्य: एक
पुरोहिताना स्थित प्राथमिक विद्यालय में मौके पर मात्र 16 बच्चे उपस्थित थे। बच्चे पढ़ाई तो कर रहे थे, लेकिन उनके हाथों में पुरानी किताबें थीं। कारण अभी तक विभाग द्वारा नई किताबें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
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दृश्य: दो
प्राथमिक विद्यालय नगरिया में काफी कम बच्चे उपस्थित थे। पढ़ने की बजाए स्कूल के गेट पर हुए जलभराव में आ जा रह थे। इससे साफ नजर आया कि बच्चे खेलने में मशगूल थे।
दृश्य: तीन
प्राथमिक विद्यालय भरतवाल जलभराव के चलते स्कूल नहीं तालाब जैसा नजर आ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि जलभराव के चलते आने-जाने में काफी परेशानी होती है। इसके चलते बच्चे कम ही आते हैं।
दृश्य: चार
प्राथमिक विद्यालय नगला पजाबा का हाल बेहाल है। यहां विद्यालय परिसर में बंधी भैंस के चलते गंदगी का अंबार लगा है। इस स्कूल को देखकर ही नहीं लगता है कि यह स्कूल है तो पढ़ाई का क्या माहौल होगा स्वयं अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं बच्चे भी बिना यूनिफार्म पहने आ रहे हैं।