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अपने पूर्वजों की तलाश में हॉलैंड से आई शांता

Sun, 26 Feb 2017 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी Updated Sun, 26 Feb 2017 11:48 PM IST
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apane poorvajon kee talaash mein holaind se aaee shaanta
पूर्वजों की तलाश में मैनपुरी आईं शांता - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
भारतीय विश्व में कहीं भी चले जाएं लेकिन यहां की संस्कृति और मिट्टी की खुशबू उन्हें खींच ही लाती है। ऐसी ही एक महिला अपने पूर्वजों की तलाश में मैनपुरी पहुंची। पूरे दिन तलाश करने के बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिली। यह महिला वर्तमान में हॉलैंड में रह रही है।
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हॉलैंड में रह रही शांता रविवार को दिल्ली से टैक्सी लेकर मैनपुरी पहुंचीं। उनके साथ दिल्ली निवासी उनकी सहेली सोनी किरन भी थीं। वे यहां पर अपने पूर्वजों की पहचान तलाशने आई थीं। उनके पास दो कागज थे। इनमें से एक पर रामरतन श्यामसुंदर और दूसरे पर सूरजकली रामसहाय लिखा है। उन्होंने बताया कि रामरतन उनके दादा थे और सूरजकली दादी। उन्हें अंग्रेज 1912 में मैनपुरी से कोलकाता और वहां से सूरीनाम (साउथ अमेरिका) लेकर गए थे। तब उनसे कहा गया था कि उन्हें भगवान राम की जमीन दिखाने ले जा रहे हैं लेकिन वहां ले जाकर उन्हें गुलाम बनाकर खेतों में काम कराया गया। वहीं पर शांता के पिता का जन्म हुआ। वर्तमान में वह हॉलैंड में रह रही हैं। उनके दो लड़कियां और एक लड़का है। सभी वहां नौकरी कर रहे हैं। सभी के सेटल हो जाने के बाद उन्होंने सोचा क्यों न भारत जाकर अपने पूर्वजों के बारे में जानकारी की जाए।
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सूरीनाम में सचिवालय से रिकार्ड निकलवाया तो पता चला कि 1912 में अंग्रेज उनके दादा दादी को लेकर आए थे। उस समय के रिकार्ड में उनका पता छपट्टी मैनपुरी लिखा है। यही कारण है कि वह पहले दिल्ली और उसके बाद यहां मैनपुरी पहुंचीं। यहां वे छपट्टी पहुंचीं लेकिन जो जानकारी उनके पास थी उससे कोई भी फायदा नहीं हुआ। कई लोगों से पूछा लेकिन कोई जानकारी नहीं दे सका। बस इतना पता चला कि उनके दादा हलवाई समाज से थे। इसके बाद वे पहले एनएमबी मिष्ठान भंडार के संचालक  के पास पहुंचीं उसके बाद पता करते हुए ब्रह्मानंद वर्मा के यहां पहुंचीं। वहां ब्रह्मानंद वर्मा ने उन्हें आश्वासन दिया कि दादा के नाम के आधार वह कोशिश करेंगे कि उनके पूर्वजों का पता कर सकें।
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