{"_id":"5759ace64f1c1bc1459c5bad","slug":"any-work-not-interfere-with-prayer","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोई भी काम इबादत के आड़े नहीं आता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोई भी काम इबादत के आड़े नहीं आता
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Thu, 09 Jun 2016 11:22 PM IST
विज्ञापन
जेबा आफताब
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोई भी काम अल्लाह की इबादत के आड़े नहीं आता है। माह-ए-रमाजन में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। आम दिनों की अपेक्षा रमजान में मस्जिदों में नमाजियों की तादात बढ़ गई है। वहीं घरों में महिलाएं भी घंटों काम करने के बाद भी अल्लाह की इबादत करना नहीं भूलती। मस्जिदों और घरों में कुरआन-ए-पाक की तिलावत हो रही है। रोजा रखने वालों में नौजवान, बुजुर्ग, महिलाएं ही नहीं छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं। यही नहीं कामकाजी महिलाएं भी रोजा रखने से पीछे नहीं हट रही हैं।
पाक रमजान माह में कामकाजी महिलाएं भी रोजा रखती हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्री जेबा आफताब का कहना है कि इन दिनों उनके विभाग में कई कार्यक्रम चल रहे हैं। इसके बाद भी वह रोजा और इबादत करना नहीं भूूलती। उन्होंने बताया कि वह अल सुबह दो बजे जागती हैं। उसके बाद सभी के लिए सहरी तैयार करती हैं। सहरी करने के बाद कुरआन-ए-पाक की तिलावत कर फिर नमाज अदा करती हैं। उसके बाद घर का कामकाज करने के बाद केंद्र पर चली जाती हैं। दिनभर काम करने के बाद शाम को खाना और इफ्तारी तैयार की जाती है। रात में नमाज अदा करने के बाद करीब 11 बजे सोना होता है।
वहीं स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत सितारा बानो का कहना है कि रोजा रखना अल्लाह ताला की सच्ची इबादत है। काम तो रोज का ही है। इन दिनों घर और बाहर काम करने में भागमभाग हो जाती है, लेकिन मन में अल्लाह की इबादत करने की ठान ली जाए, तो सब कुछ आसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि रमजान में सुबह जल्दी जागना पड़ता है। सहरी के बाद कुरआन और नमाज पढ़ते हैं। फिर घर का कामकाज करने के बाद वह ऑफिस जाती हैं। वहीं फील्ड वर्क होने से दिनभर भागमभाग रहती हैं। इसी बीच वह वक्त पर नमाज भी अदा करती हैं। उन्होंने कहा कि इंशा अल्लाह पूरे रोजे रखे जाएंगे। वहीं इफ्तार के लिए आवश्यक खाने-पीने की चीजों की दुकानें में सज गईं हैं। शहर के महमूद नगर, आगरा रोड, सिटी पोस्ट आफिस तिराहे, मदार दरवाजा, गोला बाजार, सिकंदरपुर में तो इन दिनों रोजेदारों की रौनक देखते ही बन रही है। इफ्तार के लिए सबसे ज्यादा खजूर की मांग की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पाक रमजान माह में कामकाजी महिलाएं भी रोजा रखती हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्री जेबा आफताब का कहना है कि इन दिनों उनके विभाग में कई कार्यक्रम चल रहे हैं। इसके बाद भी वह रोजा और इबादत करना नहीं भूूलती। उन्होंने बताया कि वह अल सुबह दो बजे जागती हैं। उसके बाद सभी के लिए सहरी तैयार करती हैं। सहरी करने के बाद कुरआन-ए-पाक की तिलावत कर फिर नमाज अदा करती हैं। उसके बाद घर का कामकाज करने के बाद केंद्र पर चली जाती हैं। दिनभर काम करने के बाद शाम को खाना और इफ्तारी तैयार की जाती है। रात में नमाज अदा करने के बाद करीब 11 बजे सोना होता है।
विज्ञापन
वहीं स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत सितारा बानो का कहना है कि रोजा रखना अल्लाह ताला की सच्ची इबादत है। काम तो रोज का ही है। इन दिनों घर और बाहर काम करने में भागमभाग हो जाती है, लेकिन मन में अल्लाह की इबादत करने की ठान ली जाए, तो सब कुछ आसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि रमजान में सुबह जल्दी जागना पड़ता है। सहरी के बाद कुरआन और नमाज पढ़ते हैं। फिर घर का कामकाज करने के बाद वह ऑफिस जाती हैं। वहीं फील्ड वर्क होने से दिनभर भागमभाग रहती हैं। इसी बीच वह वक्त पर नमाज भी अदा करती हैं। उन्होंने कहा कि इंशा अल्लाह पूरे रोजे रखे जाएंगे। वहीं इफ्तार के लिए आवश्यक खाने-पीने की चीजों की दुकानें में सज गईं हैं। शहर के महमूद नगर, आगरा रोड, सिटी पोस्ट आफिस तिराहे, मदार दरवाजा, गोला बाजार, सिकंदरपुर में तो इन दिनों रोजेदारों की रौनक देखते ही बन रही है। इफ्तार के लिए सबसे ज्यादा खजूर की मांग की जा रही है।
विज्ञापन