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आदेश के बाद भी चोरी छिपे हो गई रजिस्ट्री

Thu, 20 Apr 2017 06:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी Updated Thu, 20 Apr 2017 06:46 PM IST
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aadesh ke baad bhee choree chhipe ho gaee rajistree
अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे का मामला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सरकारी जमीन को खुर्दबुर्द करने का एक और मामला सामने आया है। इस बार सरकार द्वारा अधिग्रहीत की गई जमीन की स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने रजिस्ट्री तक कर दी। यही नहीं संबंधित व्यक्ति के पक्ष में दाखिला खारिज तक हो गया। यह सभी कार्रवाई तब हुई जबकि शासन से अधिग्रहीत जमीन के पट्टे काटने या उनकी रजिस्ट्री करने के संबंध में स्पष्ट आदेश आया था कि इनकी न तो रजिस्ट्री होगी और न ही पट्टे काटे जाएंगे।  
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समान पक्षी विहार के मुआवजे का मामला गरमाते ही 16 जनवरी 2015 को उपवन्य जीव प्रतिपालक राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी आगरा अनिल कुमार पटेल ने जिलाधिकारी मैनपुरी को समान पक्षी विहार की जमीन की चोरी छिपे हो रही रजिस्ट्री पर रोक लगाने को पत्र लिखा था। डीएम ने एडीएम को नियमानुसार कार्रवाई के लिए लिख दिया।
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सूत्रों के अनुसार एडीएम के यहां से निबंधन कार्यालय तक पत्र पहुंचने में सात माह 19 दिन का समय लग गया। तत्कालीन एडीएम ने निबंधन कार्यालय भोगांव को पत्रांक संख्या 168 से पांच अगस्त 15 को पत्र लिखकर नियमानुसार कार्रवाई की बात लिखी। जब तक निबंधन कार्यालय में एडीएम का लिखा पत्र पहुंचता तब तक लगभग 350 बीघा से अधिक किसानों ने जमीन की दूसरे लोगों के नाम रजिस्ट्री कर दी। जबकि धारा 26ए के अंतर्गत अधिसूचना निकलने के बाद रजिस्ट्री नहीं की जा सकती है।
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रोक के बाद 15 रजिस्ट्री कर दी गईं
समान पक्षी विहार में अधिग्रहीत जो जमीनें बेची गई हैं वो 16 जनवरी 2015 से पांच अगस्त 2015 के बीच की हैं। इनका विवरण निम्न प्रकार हैं। जमीन का खाता संख्या 4198क/22 को विक्रेता कृपाल पुत्र श्रीराम ने जोर सिंह पुत्र गंगाराम को बेचा, 4198क/52 को मनोज कुमार पुत्र भोगीलाल ने कमलेश कुमार पुत्र बदन सिंह को, 4198क/54 और 4611 को जगदीश पुत्र बाबूराम ने जोर सिंह पुत्र गंगा राम को, 4198क/55 बसंत पुत्र बाबू ने रामहेत पुत्र सिपाहीराम को, 4198क/62 को गोविंद व विष्णु सिंह पुत्र महेश सिंह व विमल देवी पत्नी महेश सिंह ने सुरेंद्र प्रताप पुत्र हुकुम सिंह को बेच दी। इसके बाद भी यह सिलसिला नही रुका और 4061, 4063, 4067, 4074, 4198क/81, 4198क/99, 4198क/60, 4198क/66, 5402ख की भी चोरी छिपे रजिस्ट्री हो गई। यही नहीं उक्त जमीनों का रजिस्ट्री के बाद दाखिल खारिज भी हो गया।
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