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‘...स्कूल जिनसे दूर था वो शिक्षा मंत्री हो गया’
Mainpuri
Updated Sat, 01 Jun 2013 05:30 AM IST
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मैनपुरी। साहित्यकारों के सम्मान एवं स्मरण की श्रंखला में गुरुवार की रात होली पब्लिक स्कूल में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मई में जन्मे कवि एवं साहित्यकार सुमित्रानंदन पंत का स्मरण किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि सत्यसेवक मिश्र ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।
साहित्यकार श्रीकृष्ण मिश्र ने कहा कि सुमित्रानंदन पंत छायावाद के मुख्य रचियता थे और उन्हें युगों-युगों तक याद किया जाएगा। गोष्ठी में राजेंद्र तिवारी ने कहा ‘पानी पानी पानी तेरा रूप सलोना है यह पानी जीवन छोना है।’ डा. अनिल मान मिश्र ने कहा कि ‘है बदन खारा हुआ सारा अगन से.. गिर रहे हैं आग के गोले गगन से।’ नाथूराम शाक्य नूतन ने कहा ‘देश ताल बगुला सफेद वेश वारे वे ताकि मीन मारत डकारत दिनों दिना।’ ओमप्रकाश वर्मा ओम ने सुनाया ‘बिन इबादत जिंदगानी व्यर्थ में कट जाएगी.. रफ्ता-रफ्ता ये जवानी उम्र में बंट जाएगी।’
कवि गिरीश यादव निराला ने सुनाया ‘मैदानों में बच्चे जब-जब अपना खेल रचाते हैं.. धर्म जाति और छुआछूत को कभी नहीं अपनाते है।’ बृजेंद्र सिंह ने मुक्तक में अपनी बात इस तरह की ‘नारी को अबला मत जानो न इसका अपमान करो.. माता भी है बेटी भी है और किसी की नारी भी।’ संचालन कर रहे बदन सिंह मस्ताना ने सुनाया ‘मत अपनी तू मान जिंदगी दो दिन की मेहमान जिंदगी।’
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व्यंग्यकार रोहित पांडेय ने मौजूदा परिवेश पर शेर पढ़ा ‘कल तलक तो चोर था वो आज संतरी हो गया.. स्कूल जिनसे दूर था वो शिक्षा मंत्री हो गया।’ शायर फसाहत अनवर ने कहा ‘अच्छे हैं हालात नहीं मांगेंगे खैरात नहीं.. जांचा-परखा सीरत को देखी भाली जाति नहीं।’ संजय दुबे ने कहा ‘वर्तमान का दौर ये नहीं है टिकाऊ.. कीमत सही लगे तो हर चीज है बिकाऊ।’
गोष्ठी के बाद शोकसभा का आयोजन किया गया। जिसमें साहित्य प्रेमी पूर्व पालिकाध्यक्ष महेश चंद्र वर्मा एवं विद्या सागर शर्मा की धर्मपत्नी के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। इस मौके पर श्रीकृष्ण मौर्य, एमएस कमठान, उदयभान सिंह राठौर, पीके त्रिपाठी, अभय शर्मा, रामवीर यादव, धीरेंद्र सिंह चौहान, बालकराम, अवधेश गुप्ता, शिवनंदन सिंह आदि उपस्थित थे। अंत में संयोजक विनोद माहेश्वरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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साहित्यकार श्रीकृष्ण मिश्र ने कहा कि सुमित्रानंदन पंत छायावाद के मुख्य रचियता थे और उन्हें युगों-युगों तक याद किया जाएगा। गोष्ठी में राजेंद्र तिवारी ने कहा ‘पानी पानी पानी तेरा रूप सलोना है यह पानी जीवन छोना है।’ डा. अनिल मान मिश्र ने कहा कि ‘है बदन खारा हुआ सारा अगन से.. गिर रहे हैं आग के गोले गगन से।’ नाथूराम शाक्य नूतन ने कहा ‘देश ताल बगुला सफेद वेश वारे वे ताकि मीन मारत डकारत दिनों दिना।’ ओमप्रकाश वर्मा ओम ने सुनाया ‘बिन इबादत जिंदगानी व्यर्थ में कट जाएगी.. रफ्ता-रफ्ता ये जवानी उम्र में बंट जाएगी।’
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कवि गिरीश यादव निराला ने सुनाया ‘मैदानों में बच्चे जब-जब अपना खेल रचाते हैं.. धर्म जाति और छुआछूत को कभी नहीं अपनाते है।’ बृजेंद्र सिंह ने मुक्तक में अपनी बात इस तरह की ‘नारी को अबला मत जानो न इसका अपमान करो.. माता भी है बेटी भी है और किसी की नारी भी।’ संचालन कर रहे बदन सिंह मस्ताना ने सुनाया ‘मत अपनी तू मान जिंदगी दो दिन की मेहमान जिंदगी।’
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व्यंग्यकार रोहित पांडेय ने मौजूदा परिवेश पर शेर पढ़ा ‘कल तलक तो चोर था वो आज संतरी हो गया.. स्कूल जिनसे दूर था वो शिक्षा मंत्री हो गया।’ शायर फसाहत अनवर ने कहा ‘अच्छे हैं हालात नहीं मांगेंगे खैरात नहीं.. जांचा-परखा सीरत को देखी भाली जाति नहीं।’ संजय दुबे ने कहा ‘वर्तमान का दौर ये नहीं है टिकाऊ.. कीमत सही लगे तो हर चीज है बिकाऊ।’
गोष्ठी के बाद शोकसभा का आयोजन किया गया। जिसमें साहित्य प्रेमी पूर्व पालिकाध्यक्ष महेश चंद्र वर्मा एवं विद्या सागर शर्मा की धर्मपत्नी के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। इस मौके पर श्रीकृष्ण मौर्य, एमएस कमठान, उदयभान सिंह राठौर, पीके त्रिपाठी, अभय शर्मा, रामवीर यादव, धीरेंद्र सिंह चौहान, बालकराम, अवधेश गुप्ता, शिवनंदन सिंह आदि उपस्थित थे। अंत में संयोजक विनोद माहेश्वरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।