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मजदूरी न मिलने से श्रमिकों ने काटा हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो महोबा।
Updated Thu, 18 Jun 2015 11:04 PM IST
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महोबा। ईंट भट्टा मालिक द्वारा आठ माह की मजदूरी न देने से नाराज श्रमिकों ने गुरुवार को ईंट भट्टा से लौटने के बाद जमकर प्रदर्शन किया और भट्टा मालिक की डीसीएम गाड़ी खड़ी करा ली। साथ ही घटना की तहरीर कोतवाली में दी है।
आठ माह पहले मौदहा का एक ठेकेदार शहर के अलावा कई गांवों से आधा सैकड़ा से अधिक श्रमिकों को ईंट भट्टा में काम करने के लिए कुछ एडवांस देकर रायबरेली ले गया था, जहां पर आठ माह तक श्रमिकों को खानपान और खर्च के लिए सिर्फ पैसे दिए गए। श्रमिकों का आठ माह का भुगतान न करने पर गुरुवार को रायबरेली से मजदूरों को भेजने आई डीसीएम गाड़ी को श्रमिकों ने अपने कब्जे में ले लिया और ड्राइवर को हड़काकर मालिक को बुलाकर हिसाब करने को कहा। साथ ही श्रमिकों ने जमकर हंगामा काटा। शहर के मोहल्ला शुक्रवारी बाजार निवासी राम स्वरूप, भानचंद्र, प्रकाश, सुरेश, बिंदादीन सहित आधा सैकड़ा मजदूरों ने शहर कोतवाली में दी गई तहरीर में आरोप लगाया कि मौदहा के रागौल निवासी ठेकेदार चिंता पुत्र पूरन ने आठ माह पूर्व हम श्रमिकों से संपर्क कर 550 रुपये प्रति हजार ईटा पथाई की दरें तय कर पचास से अधिक श्रमिकों के समूह को रायबरेली ले गए और आठ माह तक मजदूरी कराई। अब पैसे न देकर उन्हें भगा दिया गया। ठेकेदार के ऊपर पांच लाख रुपये से अधिक की मजदूरी का भुगतान बकाया है।
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आठ माह पहले मौदहा का एक ठेकेदार शहर के अलावा कई गांवों से आधा सैकड़ा से अधिक श्रमिकों को ईंट भट्टा में काम करने के लिए कुछ एडवांस देकर रायबरेली ले गया था, जहां पर आठ माह तक श्रमिकों को खानपान और खर्च के लिए सिर्फ पैसे दिए गए। श्रमिकों का आठ माह का भुगतान न करने पर गुरुवार को रायबरेली से मजदूरों को भेजने आई डीसीएम गाड़ी को श्रमिकों ने अपने कब्जे में ले लिया और ड्राइवर को हड़काकर मालिक को बुलाकर हिसाब करने को कहा। साथ ही श्रमिकों ने जमकर हंगामा काटा। शहर के मोहल्ला शुक्रवारी बाजार निवासी राम स्वरूप, भानचंद्र, प्रकाश, सुरेश, बिंदादीन सहित आधा सैकड़ा मजदूरों ने शहर कोतवाली में दी गई तहरीर में आरोप लगाया कि मौदहा के रागौल निवासी ठेकेदार चिंता पुत्र पूरन ने आठ माह पूर्व हम श्रमिकों से संपर्क कर 550 रुपये प्रति हजार ईटा पथाई की दरें तय कर पचास से अधिक श्रमिकों के समूह को रायबरेली ले गए और आठ माह तक मजदूरी कराई। अब पैसे न देकर उन्हें भगा दिया गया। ठेकेदार के ऊपर पांच लाख रुपये से अधिक की मजदूरी का भुगतान बकाया है।
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