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खदान बंद होने से दो हजार श्रमिक बेकार
ब्यूरो/ अमर उजाला, महोबा
Updated Sun, 22 Mar 2015 12:19 AM IST
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गौरा उद्योग सहकारी समिति द्वारा गौरा पत्थर खदानाें में खनन कार्य बंद कराए जाने से दो हजार श्रमिकों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। जिससे मजदूर अब पलायन के लिए विवश हो रहे हैं।
विकासखंड चरखारी के गौरहारी गांव में गौरा पत्थर खदान का गौरा उद्योग सहकारी समिति की देखरेख में संचालन हो रहा है, खदान पर ब्लास्टिंग की शिकायत ग्रामीणाें ने जिलाधिकारी से की थी जिलाधिकारी द्वारा कार कार्रवाई के डर से गौरा उद्योग सहकारी समिति ने खदान में काम बंद करा दिया है। तीन दिन से खदान में काम न होने से काम करने वाले दो हजार श्रमिक बेकार हो गए हैं। गौरा पत्थर खदान से निकलने वाले पत्थर से मूर्तियां, ताज महल, मंदिर, मस्जिद, नेमप्लेट आदि बनाए जाते हैं। बेशकीमती पत्थर की दूर-दूर तक मांग होने के कारण खदानों में 2 हजार श्रमिक काम करते हैं। ब्लास्टिंग द्वारा पास में रहने वाले ग्रामीणों के मकानों में दरार पड़ने व मकान हिलने से कार्रवाई के डर से समिति ने काम बंद करा दिया है। इससे श्रमिक पलायन के लिए मजबूर हो गए हैं। गौरा उद्योग सहकारी समिति के उपाध्यक्ष आशाराम ने बताया कि आए दिन ग्रामीणों द्वारा की जा रही शिकायतें के कारण कार्य बंद करा दिया गया है।
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विकासखंड चरखारी के गौरहारी गांव में गौरा पत्थर खदान का गौरा उद्योग सहकारी समिति की देखरेख में संचालन हो रहा है, खदान पर ब्लास्टिंग की शिकायत ग्रामीणाें ने जिलाधिकारी से की थी जिलाधिकारी द्वारा कार कार्रवाई के डर से गौरा उद्योग सहकारी समिति ने खदान में काम बंद करा दिया है। तीन दिन से खदान में काम न होने से काम करने वाले दो हजार श्रमिक बेकार हो गए हैं। गौरा पत्थर खदान से निकलने वाले पत्थर से मूर्तियां, ताज महल, मंदिर, मस्जिद, नेमप्लेट आदि बनाए जाते हैं। बेशकीमती पत्थर की दूर-दूर तक मांग होने के कारण खदानों में 2 हजार श्रमिक काम करते हैं। ब्लास्टिंग द्वारा पास में रहने वाले ग्रामीणों के मकानों में दरार पड़ने व मकान हिलने से कार्रवाई के डर से समिति ने काम बंद करा दिया है। इससे श्रमिक पलायन के लिए मजबूर हो गए हैं। गौरा उद्योग सहकारी समिति के उपाध्यक्ष आशाराम ने बताया कि आए दिन ग्रामीणों द्वारा की जा रही शिकायतें के कारण कार्य बंद करा दिया गया है।
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