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पोते की चाह में बेटे की कराईं थीं तीन शादियां

Thu, 03 Dec 2020 11:06 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 03 Dec 2020 11:06 PM IST
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Three marriages were done for son in search of grandson
महोबा में बोरवेल में गिरकर बच्चे की मौत के बाद दहाड़े मारकर रोती मां। - फोटो : MAHOBA
अमर उजाला ब्यूरो
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महोबा। घनेंद्र की मौत से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार ही नहीं पूरे कुल का दीपक बुझ गया है। घनेंद्र अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। वह तमाम आरजू, मिन्नत व मुरादों के बाद जन्मा था। पौत्र के प्रति बाबा का असीम प्यार था। यही वजह है कि उसने अपने वंश को बरकरार रखने के लिए बेटे की एक-दो नहीं बल्कि तीन शादियां कराई थी। पहली दो पत्नियों से घनेंद्र के पिता को कोई संतान नहीं हुई। पौत्र के मौत के बाद से बाबा समेत पूरे परिवार के सपने बिखर गए। बाबा ने कहा मेरे कुल का चिराग बुझ गया।
बुधौरा गांव निवासी भागीरथ कुशवाहा की पहली शादी करीब 12 साल पहले छतरपुर के मातगवां (मध्यप्रदेश) में हुई थी। पहली पत्नी से कोई संतान नहीं हुई। हालांकि, कुछ समय बाद भागीरथ की पहली पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी। तब भागीरथ के पिता कालीचरण को लगा कि आगे कुल कैसे चलेगा। इसके लिए उसने इकलौते बेटे भागीरथ की दूसरी शादी चुरबुरा गांव, महोबा में तय की थी। भागीरथ की बरात भी गई थी। शादी की रस्में पूरी होने के बाद विदाई के समय किसी ने दुल्हन से कह दिया कि भागीरथ दिमागी रूप से कमजोर है और उसे कानों से सुनाई भी कम देता है। यह सुनकर दुल्हन ने ससुराल जाने से इनकार किया था।
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दूसरी शादी सफल न होने पर कालीचरण परेशान हो गया कि उसके बेटे की कोई औलाद न हुई तो कुल आगे नहीं बढ़ पाएगा। काफी मशक्कत के उसने फिर बेटे के लिए दुल्हन ढूंढी। लमौरा गांव, महोबा की क्रांति देवी से उसकी शादी पक्की की। करीब आठ साल पहले भागीरथ और क्रांति देवी का विवाह हुआ। इसके बाद उसे दो बेटियां रेखा (6) और फिर बेटा घनेंद्र पैदा हुआ। इसके बाद बेटी नित्या (3) को क्रांति देवी ने जन्म दिया। भागीरथ के तीन बच्चे हो जाने से कालीचरण फूले नहीं समा रहा था, लेकिन बुधवार का दिन उसके परिवार के लिए काल बन गया।
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थोड़ी देर को छोड़ा तो हमेशा लिए छोड़ गया घनेंद्र
महोबा। कालीचरण कुशवाहा उस वक्त को कोस रहा है जब उसने घनेंद्र को थोड़ी देर के लिए छोड़ा था। कालीचरण पत्नी, बहू व पौत्री लेकर बेलाताल बाजार गया था। बेलाताल में उसे अपनी छोटी पौत्री नित्या का आधार कार्ड बनवाना था। कालीचरण घनेंद्र को कभी अपने से जुदा नहीं करता था।
वह हमेशा अपने साथ रखता था। वह उसके साथ खेलता और खाता था। वह पौत्र के साथ चारपाई पर सोते थे। कालीचरण ने रोते हुए बताया कि बुधवार को पत्नी, बहू और पौत्री के साथ बाइक से बाजार ले गया था। इसलिए घनेंद्र को उसके पिता के पास छोड़ गया था। उसे क्या पता था कि घनेंद्र को वह छोड़कर जा रहा है, तो घनेंद्र हमेशा के लिए उसे छोड़ कर चला जाएगा।
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हर आंख नम, पूरे गांव में मातम
महोबा। बड़ी-बड़ी आंखें, मुस्कराते ओंठ और चुलबुलेपन से घनेंद्र ने परिजनों का ही नहीं बल्कि छोटी सी उम्र में गांव वालों का भी दिल जीत लिया था। गांव वालों को बुधवार को जैसे ही पता चला कि घनेंद्र बोरवेल में गिर गया है, तो पूरे गांव के बच्चे, महिलाएं और पुरुष उसके खेत की तरफ दौड़ पड़े। सभी घनेंद्र की जान बचाने की कोशिश में जुट गए। महिलाएं और परिवार के लोग उसकी जिंदगी के लिए दुआएं करने लगे, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम ने जैसे ही घनेंद्र को बोरवेल से बाहर निकाला, तो उसके परिवार के साथ ही गांव वाले भी टीम के पीछे रोते-बिलखते दौड़ पड़े। हर कोई घनेंद्र की हालत के बारे में जानना चाहता था, लेकिन बचाव दल ने उसे एंबुलेंस में रखा और सीधे जिला अस्पताल ले गए। वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
इधर, पोस्टमार्टम के बाद दोपहर करीब दो बजे घनेंद्र का शव एंबुलेंस से उसके गांव पहुंचा, तो कोहराम मच गया। मां, पिता, बहनें, दादी और बाबा ही घनेंद्र के शव से लिपट कर रो पड़े। उनकी हालत देख कर वहां मौजूद गांव वाले भी खुद को नहीं रोक सके और उनकी भी आंखें छलक आई। हर कोई घनेंद्र की चुलबुलेपन को याद करके रोता रहा। घनेंद्र की मौत का गम हर ग्रामीण को था। यहीं वजह रही कि गांव के अधिकांश घरों में चूल्हे नहीं जले। लोगों ने रिश्तेदारों और होटल से खाना मंगाकर अपनी व बच्चों की भूख मिटाई।

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दहाड़े मार रोती रही मां, पिता ने खोई सुधबुध
घनेंद्र का शव गांव पहुंचा तो उसकी मां क्रांति देवी दहाड़े मार कर रो पड़ी। रोते-रोते वह और उसकी सास बेहोश हो गई। गांव की महिलाओं के मुंह पर पानी की छींटे डालने दोनों को होश आया। इधर, पिता भागीरथ कुशवाहा के मानों आंसू सूख गए थे। एक तरफ लोग दहाड़े मारकर रो रहे थे। वहीं पर सड़क के एक कोने पर भागीरथ चुपचाप खड़ा सिसक रहा था। लोगों ने किसी तरह उसे संभाला।
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