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वीरभूमि में अब बेटियों की किलकारियों से गूंज रहा आंगन

Fri, 11 Feb 2022 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 11 Feb 2022 11:39 PM IST
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The screams of daughters echoed with 'informer'
महोबा। जिले में मुखबिर योजना रंग ला रही है। पिछले पांच सालों में कन्या जन्म दर में हुई बढ़ोतरी में जनपद ने एक नया कीर्तिमान बनाया है। जिले के आठ अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर गोपनीय निगरानी रही। हालॉकि दो बार सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई की गई लेकिन लिंग परीक्षण का कोई प्रमाण नहीं मिला सका।
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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस-5) में महोबा जनपद में 1000 बालकों में 1056 बालिकाएं जन्म ले रहीं हैं। बुंदेलों के इस जागरुकता की हर तरफ सराहना हो रही है। पिछले चार सालों में इसमें साल दर साल इजाफा हो रहा है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. सुधाकर पांडेय ने बताया कि 2018-19 में 6335 बालिकाओं ने जन्म लिया। इसी तरह वर्ष 2019-20 में 6522, वर्ष 2020-21 में 6631 और वर्ष 2021-22 में जनवरी माह तक 4656 बालिकाएं जन्म ले चुकी हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में जनपद में मुखबिर योजना लागू हुई थी। इससे लिंग जांच पर प्रतिबंध लग गया। इसके बाद से लगातार कन्या जन्म दर बढ़ रही है।
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नोडल अधिकारी डा. वीके चौहान ने बताया कि प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम-1994 के तहत यह मुखबिर योजना चलाई जा रही है। इसके तहत मुखबिरों से लिंग जांच करने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटरों का पता लगाया जाता है। गर्भवती और उनके सहायकों की भी इसमें मदद ली जाती है। इन मुखबिरों को सरकार द्वारा 20 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक का पुरस्कार दिया जा सकता है। पहली बार पकड़े जाने पर अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालक को तीन साल की सजा व 50 हजार रुपये का जुर्माना और दूसरी बार पकड़े गए तो पांच साल तक की सजा व एक लाख रुपये जुर्माने के साथ सेंटर का अल्ट्रासाउंड लाइसेंस निरस्त करने का प्रावधान है। इस पूरे ऑपरेशन को डिकॉय ऑपरेशन नाम दिया गया है। अभी तक दो बार टीम को लिंग परीक्षण की सूचना मिली। लेकिन डिकॉय आपरेशन सफल न हो सका।
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टीम को मिलता है दो लाख रुपये तक इनाम
जिला स्वास्थ्य एवं शिक्षा अधिकारी शिव कुमार ने बताया कि सूचना तथ्यों सहित सही पाए जाने पर मुखबिर को 20 हजार रुपये, मिथ्या ग्राहक बनकर सहयोग करने वाली गर्भवती को 30 हजार रुपये, उसके सहयोगी को 10 हजार रुपये देने का प्रावधान है। दूसरी किस्त के तौर पर तय तारीखों पर कोर्ट में उपस्थित होने और वहां डिकॉय ऑपरेशन की पुष्टि करने पर मुखबिर को 20 हजार रुपये, गर्भवती महिला को 30 हजार रुपये, सहयोगी को 10 हजार रुपये मिलते हैं। न्यायालय में फैसला होने पर तीसरी किस्त के तौर पर मुखबिर को 20 हजार रुपये, गर्भवती महिला को 40 हजार रुपये, सहयोगी को 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। इस तरह तीन किस्तों में ऑपरेशन में शामिल तीनों व्यक्तियों को दो लाख रुपये तक का पुरस्कार मिलता है।
क्या कहतीं हैं बेटियां
श्रद्धा गुप्ता कहती हैं कि बुंदेलखंड में बच्चियों का जन्मदर का बढ़ना उत्साह जनक है। जो सभी के सामूहिक जागरुकता का नतीजा है। जिले में बालिका शिक्षा के लिए स्कूल कालेज खोले जाने चाहिए।

- मुस्कान का कहना कि बेटियों की जन्मदर की खबर सुनकर अच्छा लगा। पिछड़े जनपदों में शुमार महोबा ने पूरे देश को बड़ा संदेश दिया है जिसको लेकर हमे गर्व है।
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