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कोचिंग से लौट रहे इंटर के छात्र को ट्रक ने कुचला, मौत
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महोबा। कोचिंग से घर लौट रहे साइकिल सवार इंटरमीडिएट के छात्र को ट्रक ने कुचल दिया। जिससे उसकी मौत हो गई। चालक ट्रक को छोड़कर मौके से भाग निकला। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लिया है।
कोतवाली क्षेत्र के करहराकला गांव निवासी संतोष अहिरवार का पुत्र सोबरन (18) मुकुंद लाल तिवारी इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट का छात्र था। वह प्रतिदिन साइकिल से कोचिंग पढ़ने शहर के रामकथा मार्ग आता था। शनिवार की सुबह वह कोचिंग पढ़कर साइकिल से घर लौट रहा था। तभी महोबा-चरखारी मार्ग पर प्रेम नगर गांव के आगे तेज रफ्तार ट्रक ने छात्र को कुचल दिया। सूचना पर पहुंचे परिजन छात्र को जिला अस्पताल लाए। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू क र दी है।
ई-रिक्शा चलाकर पालता था परिवार
करहराकला निवासी सोबरन पढ़ाई के साथ परिवार के भरण-पोषण का जिम्मा उठाए था। पिता के लंबे समय से बीमार होने के चलते दो भाइयों में सबसे बड़ा होने के चलते वह ई-रिक्शा चलाता था। जिससे 200 से 300 रुपये आमदनी हो जाती थी। उसी से परिवार का खर्च चलता था। रात के समय वह पढ़ाई भी करता था और सुबह प्रतिदिन शहर कोचिंग आता था। तीन बड़ी बहनों की शादी हो जाने के बाद परिवार में बीमार पिता संतोष, मां राजाबाई व छोटा भाई कामता रहते हैं। बड़े बेटे की मौत से मां राजाबाई बेसुध है। उसका कहना है कि बड़ा पुत्र घर की जिम्मेदारी उठा रहा था। हादसे में उसकी मौत से अब परिवार के भरण-पोषण व पति के इलाज की समस्या पैदा हो गई।
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कोतवाली क्षेत्र के करहराकला गांव निवासी संतोष अहिरवार का पुत्र सोबरन (18) मुकुंद लाल तिवारी इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट का छात्र था। वह प्रतिदिन साइकिल से कोचिंग पढ़ने शहर के रामकथा मार्ग आता था। शनिवार की सुबह वह कोचिंग पढ़कर साइकिल से घर लौट रहा था। तभी महोबा-चरखारी मार्ग पर प्रेम नगर गांव के आगे तेज रफ्तार ट्रक ने छात्र को कुचल दिया। सूचना पर पहुंचे परिजन छात्र को जिला अस्पताल लाए। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू क र दी है।
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ई-रिक्शा चलाकर पालता था परिवार
करहराकला निवासी सोबरन पढ़ाई के साथ परिवार के भरण-पोषण का जिम्मा उठाए था। पिता के लंबे समय से बीमार होने के चलते दो भाइयों में सबसे बड़ा होने के चलते वह ई-रिक्शा चलाता था। जिससे 200 से 300 रुपये आमदनी हो जाती थी। उसी से परिवार का खर्च चलता था। रात के समय वह पढ़ाई भी करता था और सुबह प्रतिदिन शहर कोचिंग आता था। तीन बड़ी बहनों की शादी हो जाने के बाद परिवार में बीमार पिता संतोष, मां राजाबाई व छोटा भाई कामता रहते हैं। बड़े बेटे की मौत से मां राजाबाई बेसुध है। उसका कहना है कि बड़ा पुत्र घर की जिम्मेदारी उठा रहा था। हादसे में उसकी मौत से अब परिवार के भरण-पोषण व पति के इलाज की समस्या पैदा हो गई।
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