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हैंडपंप ठीक कराना सिखा रहीं शीला
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तिंदौली निवासी शीला।
- फोटो : MAHOBA
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महोबा। तिंदौली गांव की शीला महिला सशक्तीकरण की मिसाल बनकर उभरी है। तीन साल पहले तक साइकिल से गांव-गांव जाकर हैंडपंप सुधारने का काम करने वाली शीला अब महिलाओं व युवतियों को हैंडपंप ठीक करने का हुनर सिखाने में जुटीं हैं। अब तक गांव की 25 बालिकाओं को साइकिल चलाना भी सिखा चुकी हैं।
शीला के पति की मौत की मौत के बाद ससुरालवालों ने प्रताड़ित किया तो वह अपने मायके पनवाड़ी चली गई। 13 साल वह मायके में रही और इंटर तक पढ़ाई की। इसके बाद वह अपनी ननद के साथ तिंदौली गांव आ गई। वर्ष 2000 में यूनिसेफ की ओर से आयोजित हैंडपंप मरम्मत प्रशिक्षण में हिस्सा लिया। संस्था की ओर से साइकिल व औजार दिए गए।
शुरुआती दौर में शीला को काफी दिक्कत हुई। शीला बताती हैं कि लोकलाज के चलते वह घूंघट डालकर गांव के बाहर तक साइकिल लेकर पैदल जाती थीं। आत्मनिर्भर बनकर अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के जज्बे ने उन्हें घूंघट की ओट से बाहर निकाला। ब्लाक के 18 गांव में 500 से ज्यादा हैंडपंप की मरम्मत का काम किया। प्रति हैंडपंप मरम्मत में उन्हें 150 से 250 रुपये तक मिलते थे। कोई सरकारी मदद न मिलने पर उन्होंने वर्ष 2018 में काम बंदकर दिया। अब वह महिलाओं व युवतियों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं।
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शीला महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं। बढ़ती उम्र भी उनका जज्बा नहीं डिगा सकी। वह महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में सराहनीय काम कर रही हैं।
अशोक मिश्र, जिला प्रोबेशन अधिकारी
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शीला के पति की मौत की मौत के बाद ससुरालवालों ने प्रताड़ित किया तो वह अपने मायके पनवाड़ी चली गई। 13 साल वह मायके में रही और इंटर तक पढ़ाई की। इसके बाद वह अपनी ननद के साथ तिंदौली गांव आ गई। वर्ष 2000 में यूनिसेफ की ओर से आयोजित हैंडपंप मरम्मत प्रशिक्षण में हिस्सा लिया। संस्था की ओर से साइकिल व औजार दिए गए।
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शुरुआती दौर में शीला को काफी दिक्कत हुई। शीला बताती हैं कि लोकलाज के चलते वह घूंघट डालकर गांव के बाहर तक साइकिल लेकर पैदल जाती थीं। आत्मनिर्भर बनकर अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के जज्बे ने उन्हें घूंघट की ओट से बाहर निकाला। ब्लाक के 18 गांव में 500 से ज्यादा हैंडपंप की मरम्मत का काम किया। प्रति हैंडपंप मरम्मत में उन्हें 150 से 250 रुपये तक मिलते थे। कोई सरकारी मदद न मिलने पर उन्होंने वर्ष 2018 में काम बंदकर दिया। अब वह महिलाओं व युवतियों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं।
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शीला महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं। बढ़ती उम्र भी उनका जज्बा नहीं डिगा सकी। वह महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में सराहनीय काम कर रही हैं।
अशोक मिश्र, जिला प्रोबेशन अधिकारी