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तो इस बार भी बेलासागर से किसानों को नहीं मिलेगा सिंचाई का पानी
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कस्बा बेलाताल स्थित ऐतिहासिक बेलासागर तालाब
- फोटो : MAHOBA
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बेलाताल (महोबा)। वर्षाकाल का एक चौथाई समय बीत जाने के बाद भी जिले के सबसे बड़े ऐतिहासिक बेलासागर तालाब में एक फीट पानी नहीं आ सका। जिससे इस बार भी किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। तालाब का आधे से अधिक भू-भाग खाली पड़ा है। जिससे कस्बा बेलाताल समेत आसपास के एक दर्जन गांवों में होने वाली पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित होने की आशंका बनी है।
ऐतिहासिक बेलासागर तालाब 543 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में फैला है लेकिन तालाब में सिल्ट जमा हो जाने से समतल हो गया है। बीते पांच सालों से कम बारिश होने के चलते तालाब पूरी भंडारण क्षमता के साथ नहीं भर सका। इस बार बेहतर बारिश होने पर किसानों को तालाब भरने की उम्मीद थी लेकिन तालाब में पानी आने सभी नाले क्षतिग्रस्त होने के चलते एक फीट भी पानी नहीं आ सका। जिससे इस बार भी लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ेगा।
बेलासागर से दो नहरें निकली हैं। जिनसे जैतपुर, सतारी, बोरा, दादरी, घटेरा, कुलपहाड़ समेत दो दर्जन गांवों के किसानों को पानी सिंचाई का लाभ मिलता है लेकिन तालाब में पानी न होने के चलते किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
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जैतपुर निवासी देवकी नंदन, देशराज अनुरागी, राजपूत, इच्छाराम, गौरीशंकर, प्रह्लाद राजपूत, पुनीत उपाध्यक्ष, दिनेेश गोस्वामी आदि का कहना है कि पांच सालों से बेलासागर तालाब न भरने से किसान टूट चुके हैं। सिंचाई के अभाव में अधिकांश खेत खाली पड़े रहते हैं। तालाब में बाहरी बांधों से पानी आने का कोई स्रोत नहीं है। धवल नाला का पानी भी तालाब में नहीं आ पाता है। तालाब न भरने से करोड़ों की लागत की पेयजल समूह योजना बेमतलब साबित हो रही है। पूरे वर्ष पेयजल आपूर्ति को लेकर ग्रामीण चिंतित है।
खाली भूमि पर कब्जा कर रहे भूमाफिया
बेेलासागर तालाब न भरने से भू-माफियाओं में खुशी नजर आ रही है। भारी क्षेत्रफल में फैले बेलासागर में कम बारिश होने और बारिश के पानी के आने का स्रोत न होने से तालाब नहीं भर सका। खाली भू-भाग में भूमाफिया फसल बोकर मालामाल हो रहे हैं। पिछले वर्ष प्रशासन ने तालाब की भूमि पर अवैध तरीके से बोई गई कुछ फसल नष्ट करा दी थी लेकिन अधिकांश भू-माफियाओं ने अपनी फसल काट ली थी। इस बार भी तालाब का अधिकांश क्षेत्रफल खाली पड़ा होने से भू-माफिया कब्जा जमाने में लगे हैं।
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ऐतिहासिक बेलासागर तालाब 543 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में फैला है लेकिन तालाब में सिल्ट जमा हो जाने से समतल हो गया है। बीते पांच सालों से कम बारिश होने के चलते तालाब पूरी भंडारण क्षमता के साथ नहीं भर सका। इस बार बेहतर बारिश होने पर किसानों को तालाब भरने की उम्मीद थी लेकिन तालाब में पानी आने सभी नाले क्षतिग्रस्त होने के चलते एक फीट भी पानी नहीं आ सका। जिससे इस बार भी लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ेगा।
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बेलासागर से दो नहरें निकली हैं। जिनसे जैतपुर, सतारी, बोरा, दादरी, घटेरा, कुलपहाड़ समेत दो दर्जन गांवों के किसानों को पानी सिंचाई का लाभ मिलता है लेकिन तालाब में पानी न होने के चलते किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
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जैतपुर निवासी देवकी नंदन, देशराज अनुरागी, राजपूत, इच्छाराम, गौरीशंकर, प्रह्लाद राजपूत, पुनीत उपाध्यक्ष, दिनेेश गोस्वामी आदि का कहना है कि पांच सालों से बेलासागर तालाब न भरने से किसान टूट चुके हैं। सिंचाई के अभाव में अधिकांश खेत खाली पड़े रहते हैं। तालाब में बाहरी बांधों से पानी आने का कोई स्रोत नहीं है। धवल नाला का पानी भी तालाब में नहीं आ पाता है। तालाब न भरने से करोड़ों की लागत की पेयजल समूह योजना बेमतलब साबित हो रही है। पूरे वर्ष पेयजल आपूर्ति को लेकर ग्रामीण चिंतित है।
खाली भूमि पर कब्जा कर रहे भूमाफिया
बेेलासागर तालाब न भरने से भू-माफियाओं में खुशी नजर आ रही है। भारी क्षेत्रफल में फैले बेलासागर में कम बारिश होने और बारिश के पानी के आने का स्रोत न होने से तालाब नहीं भर सका। खाली भू-भाग में भूमाफिया फसल बोकर मालामाल हो रहे हैं। पिछले वर्ष प्रशासन ने तालाब की भूमि पर अवैध तरीके से बोई गई कुछ फसल नष्ट करा दी थी लेकिन अधिकांश भू-माफियाओं ने अपनी फसल काट ली थी। इस बार भी तालाब का अधिकांश क्षेत्रफल खाली पड़ा होने से भू-माफिया कब्जा जमाने में लगे हैं।