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शहीद स्मारक निर्माण के लिए गांधी जयंती से होगा सत्याग्रह
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महोबा। पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर पिछले 460 दिन से अनशन पर बैठे बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर गांधी जयंती से हवेली दरवाजा शहीद स्थल मैदान में स्मारक निर्माण के लिए सत्याग्रह शुरू करेंगे। वे अन्न जल त्याग कर आल्हा चौक स्थित अनशन स्थल पर ही अपना सत्याग्रह प्रारंभ करेंगे।
बुंदेली समाज के संयोजक ने बताया कि जिस हवेली दरवाजा मैदान में वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत ने 16 क्रांतिकारियों को फांसी पर लटका दिया था। आज वह शहीद स्थल कूड़ाघर बन गया है। आसपास के सभी मुहल्लों का कूड़ा वहीं फेंका जाता है। उन सभी शहीदों के सम्मान में हर वर्ष कूड़े की सफाई करवा कर स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस में ध्वजारोहण कार्यक्रम होता है। दीवाली में वहीं दीपदान होता है। उन शहीदों की याद में ऐतिहासिक कजली मेले का विजय जुलूस भी इसी मैदान से शुरू होता है। यहीं पर गुदड़ी का मेला लगता है। इसी मैदान से बड़ीहाट की सड़क जाती है। मोहर्रम में ताजिया रखे जाते हैं। उन क्रांतिकारियों की स्मृति में यहां एक शहीद स्मारक बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस बहुप्रतीक्षित स्मारक के निर्माण के लिए नगर पालिका परिषद ने एक वर्ष पहले टेंडर निकालकर ठेका दे दिया था। उसके लिए 32 लाख रुपये की धनराशि भी स्वीकृत हुई थी। इसी बीच कुछ लोगों ने अदालत में याचिका दायर कर शहीद स्थल मैदान पर अपना मालिकाना हक जताया था। उन्होंने बताया कि स्मारक निर्माण में अड़चन भी नहीं है। फिर स्मारक निर्माण में देरी क्यों की जा रही है? बताया कि 15 दिन पहले नगर पालिका प्रशासन को चिट्ठी लिखकर गांधी जयंती से पहले स्मारक निर्माण शुरू कराने का आग्रह किया था।
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बुंदेली समाज के संयोजक ने बताया कि जिस हवेली दरवाजा मैदान में वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत ने 16 क्रांतिकारियों को फांसी पर लटका दिया था। आज वह शहीद स्थल कूड़ाघर बन गया है। आसपास के सभी मुहल्लों का कूड़ा वहीं फेंका जाता है। उन सभी शहीदों के सम्मान में हर वर्ष कूड़े की सफाई करवा कर स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस में ध्वजारोहण कार्यक्रम होता है। दीवाली में वहीं दीपदान होता है। उन शहीदों की याद में ऐतिहासिक कजली मेले का विजय जुलूस भी इसी मैदान से शुरू होता है। यहीं पर गुदड़ी का मेला लगता है। इसी मैदान से बड़ीहाट की सड़क जाती है। मोहर्रम में ताजिया रखे जाते हैं। उन क्रांतिकारियों की स्मृति में यहां एक शहीद स्मारक बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
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उन्होंने बताया कि इस बहुप्रतीक्षित स्मारक के निर्माण के लिए नगर पालिका परिषद ने एक वर्ष पहले टेंडर निकालकर ठेका दे दिया था। उसके लिए 32 लाख रुपये की धनराशि भी स्वीकृत हुई थी। इसी बीच कुछ लोगों ने अदालत में याचिका दायर कर शहीद स्थल मैदान पर अपना मालिकाना हक जताया था। उन्होंने बताया कि स्मारक निर्माण में अड़चन भी नहीं है। फिर स्मारक निर्माण में देरी क्यों की जा रही है? बताया कि 15 दिन पहले नगर पालिका प्रशासन को चिट्ठी लिखकर गांधी जयंती से पहले स्मारक निर्माण शुरू कराने का आग्रह किया था।
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