{"_id":"58bd985f4f1c1b6d43dc4317","slug":"revenues-even-after-millions-of-minerals-collapsed-roads","type":"story","status":"publish","title_hn":"करोड़ों राजस्व देने के बाद भी खनिज क्षेत्रों की सड़कें ध्वस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
करोड़ों राजस्व देने के बाद भी खनिज क्षेत्रों की सड़कें ध्वस्त
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
Updated Mon, 06 Mar 2017 10:41 PM IST
विज्ञापन
pm modi road show in varanasi
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कबरई मंडी के खनिज बाहुल क्षेत्रों की सड़कें पूरी तरह ध्वस्त हैं। इससे आये दिन सड़क पर ही वाहन खराब हो जाते हैं, जिससे मंडी का आवागमन ठप हो जाता है। करोड़ों राजस्व देने के बाद भी खनिज विकास निधि से सड़कों के निर्माण के लिए धनराशि स्वीकृत नहीं की गईं, जिससे जर्जर सड़कों की मरम्मत नहीं हो पाई है।
पत्थर मंडी कबरई के पहरा, डहर्रा, मकरबई, पचपहरा, गंज आदि प्रमुख खनिज बाहुल्य क्षेत्र आते है। यहां हजारों ट्रक पत्थर का खनन प्रतिदिन होता है। साथ ही मंडी से गिट्टी निकासी पर खनिज विभाग को प्रतिवर्ष 200 करोड़, वाणिज्यकर को 30 करोड़ व बिजली विभाग को 50 करोड़ और आयकर को 10 करोड़ का राजस्व मिलता है। इसके बावजूद मंडी की मूलभूत सुविधाओं के लिए शासन प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। खनन क्षेत्रों की सड़कें बड़े-बड़े गड्ढ़ों में तब्दील हो चुकी है। गिट्टी लेकर निकलने वाले वाहन रास्ते में ही खराब होकर मार्ग जाम कर देते है।
खनन उद्योग कल्याण समिति के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह ने बताया कि खनिज मद में सर्वाधिक राजस्व देने वाले जिलों को खनिज विकास निधि से सड़केें, हैंडपंप, श्रमिक विश्राम गृह आदि मद में धनराशि देने का प्रावधान है। प्रदेश में सर्वाधिक राजस्व महोबा जिले से खनिज विभाग को दिया जाता है। 10 साल पहले खनिज विकास निधि से डहर्रा, पचपहरा, पहरा आदि में पीडब्लूडी ने सड़कों का निर्माण कराया था। गुणवत्ता विहीन सड़कें निर्मित होने के कारण एक बारिश में ही सड़के उखड़ गईं। निरंतर मांग के बावजूद इन क्षेत्रों में खनिज विकास निधि से सड़कों का निर्माण नही कराया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पत्थर मंडी कबरई के पहरा, डहर्रा, मकरबई, पचपहरा, गंज आदि प्रमुख खनिज बाहुल्य क्षेत्र आते है। यहां हजारों ट्रक पत्थर का खनन प्रतिदिन होता है। साथ ही मंडी से गिट्टी निकासी पर खनिज विभाग को प्रतिवर्ष 200 करोड़, वाणिज्यकर को 30 करोड़ व बिजली विभाग को 50 करोड़ और आयकर को 10 करोड़ का राजस्व मिलता है। इसके बावजूद मंडी की मूलभूत सुविधाओं के लिए शासन प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। खनन क्षेत्रों की सड़कें बड़े-बड़े गड्ढ़ों में तब्दील हो चुकी है। गिट्टी लेकर निकलने वाले वाहन रास्ते में ही खराब होकर मार्ग जाम कर देते है।
विज्ञापन
खनन उद्योग कल्याण समिति के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह ने बताया कि खनिज मद में सर्वाधिक राजस्व देने वाले जिलों को खनिज विकास निधि से सड़केें, हैंडपंप, श्रमिक विश्राम गृह आदि मद में धनराशि देने का प्रावधान है। प्रदेश में सर्वाधिक राजस्व महोबा जिले से खनिज विभाग को दिया जाता है। 10 साल पहले खनिज विकास निधि से डहर्रा, पचपहरा, पहरा आदि में पीडब्लूडी ने सड़कों का निर्माण कराया था। गुणवत्ता विहीन सड़कें निर्मित होने के कारण एक बारिश में ही सड़के उखड़ गईं। निरंतर मांग के बावजूद इन क्षेत्रों में खनिज विकास निधि से सड़कों का निर्माण नही कराया जा रहा है।
विज्ञापन