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पान की फसल बचाने की जद्दोजहद कर रहे किसान
अमर उजाला महाोबा
Updated Fri, 12 Jun 2015 11:59 PM IST
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महोबा। भीषण गर्मी से पान को बचाने के लिए किसान जद्दोजहद कर रहा है। भीषण गर्मी और धूप के चलते तेजी से सूख रहे पान को बचाने के लिए किसान तीन तीन बार सिंचाई कर रहे हैं। जिले में पानी की कमी होनेे से पान कृषकों को पानी की कमी खटक रही है।
देश विदेश में मशहूर महोबा का पान तेज धूप से झुलसने लगा है। जिससे पान किसान इन्हें बचाने के लिए तरह तरह के जतन कर रहे हैं। किसानों ने पान बरेजों में चारों तरफ कपड़े और पुरानी साड़ियां बांधकर पानों को धूप से बचाने का काम कर रहे है। वहीं तेज धूप के चलते पान के झुलस जाने से उत्पादन भी घट गया है, जिसके चलते देसावरी पान 600 से 700 रुपये प्रति ढोली (200 पान), बंगली पान 300 से 400 रुपये प्रति ढोली बिक रहा है।
जिले में दो दशक पहले पान की खेती 400 एकड़ में होती थी, जो अब घटकर सौ एकड़ में ही सिमट कर रह गई है। कभी ओलावृष्टि, अतिवृष्टि तो कभी सूखे से पान की फसल बर्बाद हो जाती है, जिससे तमाम पान कृषकों ने पान के पुश्तैनी कारोबार से नाता तोड़ लिया है। इस साल एक माह से तापमान चरम सीमा पर होने से इसका असर पान की फसल पर पड़ रहा है। पान की फसल को बचाने के लिए किसान जद्दोजहद करने में जुटे हुए हैं। पान कृषक पूरन चौरसिया, जीवनलाल चौरसिया, जगदीश चौरसिया ने बताया कि बढ़ते तापमान से फसल को बचाने के लिए तरह-तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।
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सिंचाई के जल स्रोतों ने दिए जवाब
पान बरेजों में सिंचाई के लिए ढालनुमा खोदे जाने वाले बड़े-बडे गड्ढों ने भी इस साल जवाब दे दिया है, जिससे पान किसान की मुश्किलें बढ़ गई हैं, लेकिन पान की फसल को बचाने के लिए किसान तेज धूप और लू के थपेड़ों के बीच गड्ढों को और गहरा करके पानी निकालने में जुटे हुए हैं। पहले पान किसान इन ढालनुमा गड्ढों में उतरकर बड़े बड़े घड़ों से पानी भरकर पानों की सिंचाई करते थे, लेकिन अब किसानों ने तरीका बदल दिया है और छोटी छोटी पानी की मशीन रखकर सिंचाई करने लगे हैं।
तेज धूप और लू के थपेड़े पान फसल के लिए अनुकूल नहीं है। बढ़ते तापमान को पान फसल के अनुकूल बनाने के लिए पान बरेजों के चारों तरफ घास को घनी कर दें। खुला होने की जगह कपड़ा बांधकर बचाव करें। दिन में सुबह 10, दोपहर 2 बजे और अपरांह 4 बजे फसल में पानी की सिंचाई करें। बरेजों के ऊपरी हिस्से में ठीक तरह छवाई करें, जिससे पान बरेजे के अंदर गर्म हवाएं न जा सके।
डा. आई सिद्दकी
शोध अधिकारी पान अनुसंधान केंद्र महोबा
देश विदेश में मशहूर महोबा का पान तेज धूप से झुलसने लगा है। जिससे पान किसान इन्हें बचाने के लिए तरह तरह के जतन कर रहे हैं। किसानों ने पान बरेजों में चारों तरफ कपड़े और पुरानी साड़ियां बांधकर पानों को धूप से बचाने का काम कर रहे है। वहीं तेज धूप के चलते पान के झुलस जाने से उत्पादन भी घट गया है, जिसके चलते देसावरी पान 600 से 700 रुपये प्रति ढोली (200 पान), बंगली पान 300 से 400 रुपये प्रति ढोली बिक रहा है।
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जिले में दो दशक पहले पान की खेती 400 एकड़ में होती थी, जो अब घटकर सौ एकड़ में ही सिमट कर रह गई है। कभी ओलावृष्टि, अतिवृष्टि तो कभी सूखे से पान की फसल बर्बाद हो जाती है, जिससे तमाम पान कृषकों ने पान के पुश्तैनी कारोबार से नाता तोड़ लिया है। इस साल एक माह से तापमान चरम सीमा पर होने से इसका असर पान की फसल पर पड़ रहा है। पान की फसल को बचाने के लिए किसान जद्दोजहद करने में जुटे हुए हैं। पान कृषक पूरन चौरसिया, जीवनलाल चौरसिया, जगदीश चौरसिया ने बताया कि बढ़ते तापमान से फसल को बचाने के लिए तरह-तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।
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सिंचाई के जल स्रोतों ने दिए जवाब
पान बरेजों में सिंचाई के लिए ढालनुमा खोदे जाने वाले बड़े-बडे गड्ढों ने भी इस साल जवाब दे दिया है, जिससे पान किसान की मुश्किलें बढ़ गई हैं, लेकिन पान की फसल को बचाने के लिए किसान तेज धूप और लू के थपेड़ों के बीच गड्ढों को और गहरा करके पानी निकालने में जुटे हुए हैं। पहले पान किसान इन ढालनुमा गड्ढों में उतरकर बड़े बड़े घड़ों से पानी भरकर पानों की सिंचाई करते थे, लेकिन अब किसानों ने तरीका बदल दिया है और छोटी छोटी पानी की मशीन रखकर सिंचाई करने लगे हैं।
तेज धूप और लू के थपेड़े पान फसल के लिए अनुकूल नहीं है। बढ़ते तापमान को पान फसल के अनुकूल बनाने के लिए पान बरेजों के चारों तरफ घास को घनी कर दें। खुला होने की जगह कपड़ा बांधकर बचाव करें। दिन में सुबह 10, दोपहर 2 बजे और अपरांह 4 बजे फसल में पानी की सिंचाई करें। बरेजों के ऊपरी हिस्से में ठीक तरह छवाई करें, जिससे पान बरेजे के अंदर गर्म हवाएं न जा सके।
डा. आई सिद्दकी
शोध अधिकारी पान अनुसंधान केंद्र महोबा