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श्रद्घा-भक्ति के साथ मना नाग पंचमी पर्व, मंदिरों में जुटी भीड़
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चरखारी बाईपास मार्ग स्थित नाग देवता मंदिर में पूजा-अर्चना करतीं महिलाएं
- फोटो : MAHOBA
महोबा। जिले में नाग पंचमी का पर्व श्रृद्धा, भक्ति व परंपरागत तरीके से मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों में नाग देवता की पूजा शुरू हो गई। लोगों ने नाग को दूध पिलाकर मनोकामना मानी। घरों में भी पकवान बनाए गए।
नाग पंचमी पर कोरोना का असर साफ दिखाई दिया। मेलों व दंगल के आयोजन नहीं हो सके। लोगों ने घरों पर ही पूजा-अर्चना की। सुबह से ही महिलाओं ने गाय के गोबर से नाग की आकृति बनाई। शाम के समय घर के दरवाजे पर इन्हीं आकृतियों में गाय का दूध छिड़ककर विधि-विधान से पूजा की। नाग मंदिरों में भक्तों के आने-जाने का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा।
महिलाओं ने मंदिरों में नाग देवता की पूजा कर दूध अर्पित किया। पूरे दिन सपेरे घर-घर जाकर नाग देवता के दर्शन कराते रहे।
ज्योतिषाचार्य पंडित भरत त्रिपाठी ने बताया कि आज भी घरों के बाहर गोबर से नाग की आकृति बनाकर घी-दूध से पूजन करने की परंपरा है। नाग पंचमी पर विधि-विधान से पूजा करने और नागों को दूध पिलाने से कालसर्प दोष से निजात मिलती है। नाग पंचमी पर ही घर-घर में भुजरियां बोई जाती हैं। रक्षाबंधन को सरोवरों में भुजरियों का विसर्जन होता है।
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नाग पंचमी पर कोरोना का असर साफ दिखाई दिया। मेलों व दंगल के आयोजन नहीं हो सके। लोगों ने घरों पर ही पूजा-अर्चना की। सुबह से ही महिलाओं ने गाय के गोबर से नाग की आकृति बनाई। शाम के समय घर के दरवाजे पर इन्हीं आकृतियों में गाय का दूध छिड़ककर विधि-विधान से पूजा की। नाग मंदिरों में भक्तों के आने-जाने का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा।
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महिलाओं ने मंदिरों में नाग देवता की पूजा कर दूध अर्पित किया। पूरे दिन सपेरे घर-घर जाकर नाग देवता के दर्शन कराते रहे।
ज्योतिषाचार्य पंडित भरत त्रिपाठी ने बताया कि आज भी घरों के बाहर गोबर से नाग की आकृति बनाकर घी-दूध से पूजन करने की परंपरा है। नाग पंचमी पर विधि-विधान से पूजा करने और नागों को दूध पिलाने से कालसर्प दोष से निजात मिलती है। नाग पंचमी पर ही घर-घर में भुजरियां बोई जाती हैं। रक्षाबंधन को सरोवरों में भुजरियों का विसर्जन होता है।
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