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Mahoba News: सिलिंडर छोड़ अब कोयला भट्ठी सुलगा रहे ढाबा संचालक
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महोबा। एक महीने से अधिक समय से रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति के इंतजार में बैठे महोबा के ढाबा संचालकों की आंखें अब खुलने लगी है। व्यापार बचाने के लिए सिलिंडर को छोड़ अब कोयला भट्ठी की ओर अपनी रुचि दिखानी शुरू कर दी है। इससे वह व्यापार में आ रही दिक्कत को दूर कर सकें।
बता दें कि महोबा में स्थानीय स्तर पर कोयला की थोक दुकान नहीं है और लोग मध्यप्रदेश के जनपद छतरपुर से कोयला मंगा रहे थे। अब लकड़ी की मांग भी बढ़ी है।
लवकुशनगर तिराहा में लकड़ी का थोक कारोबार करने वाले रामप्रकाश बताते हैं कि पिछले कुछ समय से भोजनालय, ढाबा संचालकों की ओर से थोक में लकड़ी खरीदी जा रही है। हालांकि बहुत अधिक ग्राहक तो नहीं आ रहे हैं लेकिन वृद्धि देखी जा रही है। लकड़ी के दाम में 50 से 100 रुपये की वृद्धि हुई है। लकड़ी 600 से 700 रुपये क्विंटल बेची जा रही है।
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बता दें कि महोबा में स्थानीय स्तर पर कोयला की थोक दुकान नहीं है और लोग मध्यप्रदेश के जनपद छतरपुर से कोयला मंगा रहे थे। अब लकड़ी की मांग भी बढ़ी है।
लवकुशनगर तिराहा में लकड़ी का थोक कारोबार करने वाले रामप्रकाश बताते हैं कि पिछले कुछ समय से भोजनालय, ढाबा संचालकों की ओर से थोक में लकड़ी खरीदी जा रही है। हालांकि बहुत अधिक ग्राहक तो नहीं आ रहे हैं लेकिन वृद्धि देखी जा रही है। लकड़ी के दाम में 50 से 100 रुपये की वृद्धि हुई है। लकड़ी 600 से 700 रुपये क्विंटल बेची जा रही है।
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