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जीत की खुशी में मनाया जाता कजली मेला

Tue, 25 Jul 2017 10:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा।
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा। Updated Tue, 25 Jul 2017 10:49 PM IST
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Kajli Fair celebrated in joy of victory
वीर आल्हा व ऊदल - फोटो : amarujala
उत्तर भारत का मशहूर 835 साल पुराना कजली ग्रामीण मेला पृथ्वीराज को पराजित करने की याद में मनाया जाता है। सपा शासन में इसे राजकीय दर्जा दिए जाने की घोषणा की गई थी, लेकिन उस पर अमल आजतक नहीं किया गया।  
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1182 में रक्षाबंधन के दिन राजकुमारी चंद्रावली अपनी सहेलियों के साथ कजलियां खोटने जा रही थी। तभी पृथ्वीराज की सेना ने कीरत सागर के तट पर युद्ध कर दिया था। राजा परमाल की रक्षा के लिए आल्हा ऊदल ने पृथ्वीराज चौहान से युद्ध करके उसे पराजित कर दिया था। युद्ध के कारण रक्षाबंधन का त्योहार पूर्णिमा के बाद परेवा को मनाया गया।
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तब से महोबा में रक्षाबंधन का त्योहार आज भी दूसरे दिन मनाया जाता है। युद्ध में विजय के बाद मेले के प्रति उत्साह और बढ़ गया।
पृथ्वीराज चौहान शक्ति का प्रतीक था और उसकी सेना को आल्हा ऊदल ने पराजित कर खदेड़ दिया था।

इस मेले में हर साल एक लाख से ज्यादा की भीड़ जुटती है। कजली की परंपरा बहुत पुरानी है। इसलिए यहां भी कजली मेले के पहले दिन कजलियां खोटने का रिवाज चला आ रहा है।
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