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Mahoba News: छुआरा-किशमिश से महंगा लहसुन और धनिया
Sat, 21 Sep 2024 11:58 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Sat, 21 Sep 2024 11:58 PM IST
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महोबा। बारिश के चलते बाहर से आने वाली सब्जियों की आवक कम हो गई है। इससे सब्जियों की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। वर्तमान में केवल 25 फीसदी माल ही आ रहा है।
सब्जियों की कीमतों में उछाल आने से रसोई का बजट बिगड़ गया है। छुआरा-किशमिश से भी महंगी धनिया व लहसुन बिकने से यह आदमी की पहुंच से दूर हो गई है। शहर में 70 फीसदी सब्जी बाहर से आती है जबकि 30 फीसदी सब्जी की पैदावार जनपद के किसान करते हैं।
बारिश से सब्जियों के ट्रक रास्ते में फंस गए हैं। महाराष्ट्र, बनारस, कानपुर, मध्य प्रदेश आदि स्थानों से आने वाली सब्जियां मंडी तक आसानी से नहीं पहुंच पा रही हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाली हरी धनिया के खेतों में पानी भरने से आवक कम हो गई है।
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इससे इसके दाम 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जो छुआरा और किशमिश की कीमत से ज्यादा हैं। बारिश के कारण महाराष्ट्र से आने वाली अचार की मिर्च, शिमला मिर्च, टमाटर, कानपुर की लौकी, तोरई, महाराष्ट्र और एमपी से आने वाला प्याज महंगा हुआ है।
मेवा कारोबारी बता रहे हैं कि छुआरा 250 से 350 और किशमिश करीब 220 से 250 रुपये प्रति किलो है। सब्जी विक्रेता काशी ने बताया कि जनपद में हुई बारिश का पानी अभी भी कई खेतों में भरा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर जिन सब्जियों की पैदावार हो रही थी वह बर्बाद हो गईं जबकि बाहर से आने वाली सब्जी की आवक कम हुई है। इससे सब्जी के दामों में उछाल आया है।
तरोई 20 से 40, कद्दू 10 से बढ़कर 25 रुपये किलो
सब्जी की आवक कम होने से एक सप्ताह में लहसुन के दाम 300 से बढ़कर 400, टमाटर 30 से बढ़कर 50, धनिया 150 से बढ़कर 400, आलू 25 से बढ़कर 35, पालक 40 से बढ़कर 100, तरोई 20 से बढ़कर 40, कद्दू 10 से बढ़कर 25, करेला 30 से बढ़कर 50 और शिमला मिर्च 120 से बढ़कर 150 रुपये प्रति किलो पहुंच गए हैं।
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सब्जियों की कीमतों में उछाल आने से रसोई का बजट बिगड़ गया है। छुआरा-किशमिश से भी महंगी धनिया व लहसुन बिकने से यह आदमी की पहुंच से दूर हो गई है। शहर में 70 फीसदी सब्जी बाहर से आती है जबकि 30 फीसदी सब्जी की पैदावार जनपद के किसान करते हैं।
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बारिश से सब्जियों के ट्रक रास्ते में फंस गए हैं। महाराष्ट्र, बनारस, कानपुर, मध्य प्रदेश आदि स्थानों से आने वाली सब्जियां मंडी तक आसानी से नहीं पहुंच पा रही हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाली हरी धनिया के खेतों में पानी भरने से आवक कम हो गई है।
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इससे इसके दाम 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जो छुआरा और किशमिश की कीमत से ज्यादा हैं। बारिश के कारण महाराष्ट्र से आने वाली अचार की मिर्च, शिमला मिर्च, टमाटर, कानपुर की लौकी, तोरई, महाराष्ट्र और एमपी से आने वाला प्याज महंगा हुआ है।
मेवा कारोबारी बता रहे हैं कि छुआरा 250 से 350 और किशमिश करीब 220 से 250 रुपये प्रति किलो है। सब्जी विक्रेता काशी ने बताया कि जनपद में हुई बारिश का पानी अभी भी कई खेतों में भरा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर जिन सब्जियों की पैदावार हो रही थी वह बर्बाद हो गईं जबकि बाहर से आने वाली सब्जी की आवक कम हुई है। इससे सब्जी के दामों में उछाल आया है।
तरोई 20 से 40, कद्दू 10 से बढ़कर 25 रुपये किलो
सब्जी की आवक कम होने से एक सप्ताह में लहसुन के दाम 300 से बढ़कर 400, टमाटर 30 से बढ़कर 50, धनिया 150 से बढ़कर 400, आलू 25 से बढ़कर 35, पालक 40 से बढ़कर 100, तरोई 20 से बढ़कर 40, कद्दू 10 से बढ़कर 25, करेला 30 से बढ़कर 50 और शिमला मिर्च 120 से बढ़कर 150 रुपये प्रति किलो पहुंच गए हैं।