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अधिवक्ता आत्महत्या मामले में पूर्व कबरई ब्लॉक प्रमुख को मिली जमानत
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महोबा। अधिवक्ता मुकेश पाठक आत्महत्या मामले में हमीरपुर जेल में निरुद्घ पूर्व ब्लॉक प्रमुख कबरई चौधरी छत्रपाल यादव को जमानत मिली है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लंबी सुनवाई के बाद जमानत मंजूर की। वसूली, आत्महत्या के लिए प्रेरित करने व गैंगस्टर एक्ट के मामले में चौधरी छत्रपाल छह माह से अधिक समय से जेल में निरुद्घ थे। उनकी संपत्तियों पर कुर्की की कार्रवाई भी हो चुकी है।
समदनगर निवासी अधिवक्ता मुकेश पाठक ने ब्लॉक प्रमुख समेत पांच लोगों पर वसूली का आरोप लगाया था। उन्होंने कोतवाली में तहरीर देकर बेटे शिवम पाठक उर्फ छोटू को डरा-धमकाकर चेक व नगदी के माध्यम से 60 लाख रुपये वसूूलने का आरोप लगाया था। पुलिस ने आठ फरवरी को पूर्व ब्लॉक प्रमुख कबरई छत्रपाल यादव, भतीजे विक्रम यादव, रवि सोनी, आनंद मोहन व अंकित सोनी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपियों के दबाव के चलते अधिवक्ता मुकेश पाठक ने 13 फरवरी की रात अपनी लाइसेंसी रायफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने मौके पर पहुंच सुसाइड नोट बरामद किया था। सुसाइड नोट में चौधरी छत्रपाल व उसके साथियों द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने पर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी से आहत होकर आत्महत्या करने की बात लिखी थी। जिसके बाद पुलिस ने चौधरी छत्रपाल व उनके साथियों पर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने व गैंगस्टर एक्ट के अलग-अलग मामले दर्ज किए थे।
चौधरी छत्रपाल के मामले की पैरवी कर रहे इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि चौधरी छत्रपाल को वसूली, आत्महत्या के लिए प्रेरित करने व गैंगस्टर के तीनों मामलों में जमानत मंजूर की गई है। कोर्ट नं. 79 के न्यायाधीश राजीव जोशी ने लंबी सुनवाई के बाद जमानत याचिका मंजूर की।
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समदनगर निवासी अधिवक्ता मुकेश पाठक ने ब्लॉक प्रमुख समेत पांच लोगों पर वसूली का आरोप लगाया था। उन्होंने कोतवाली में तहरीर देकर बेटे शिवम पाठक उर्फ छोटू को डरा-धमकाकर चेक व नगदी के माध्यम से 60 लाख रुपये वसूूलने का आरोप लगाया था। पुलिस ने आठ फरवरी को पूर्व ब्लॉक प्रमुख कबरई छत्रपाल यादव, भतीजे विक्रम यादव, रवि सोनी, आनंद मोहन व अंकित सोनी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपियों के दबाव के चलते अधिवक्ता मुकेश पाठक ने 13 फरवरी की रात अपनी लाइसेंसी रायफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने मौके पर पहुंच सुसाइड नोट बरामद किया था। सुसाइड नोट में चौधरी छत्रपाल व उसके साथियों द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने पर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी से आहत होकर आत्महत्या करने की बात लिखी थी। जिसके बाद पुलिस ने चौधरी छत्रपाल व उनके साथियों पर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने व गैंगस्टर एक्ट के अलग-अलग मामले दर्ज किए थे।
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चौधरी छत्रपाल के मामले की पैरवी कर रहे इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि चौधरी छत्रपाल को वसूली, आत्महत्या के लिए प्रेरित करने व गैंगस्टर के तीनों मामलों में जमानत मंजूर की गई है। कोर्ट नं. 79 के न्यायाधीश राजीव जोशी ने लंबी सुनवाई के बाद जमानत याचिका मंजूर की।
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