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एक साथ उठीं चार अर्थियां, हर आंख हुई नम, चारो ओर दिखा मातम
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खन्ना (महोबा)। बेटी की विदाई के वक्त घर में सिलिंडर फटने पर खौलते तेल से झुलसी एक और महिला ने बुधवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे में मरने वाली महिलाओं की संख्या पांच हो गई है। बुधवार को एक साथ चार अर्थियां उठने से परिवार के साथ साथ पूरे गांव में कोहराम सा मचा रहा। हादसे में एक ही परिवार की सात महिलाएं झुलसी थी। दो महिलाओं का अभी भी झांसी में इलाज चल रहा है।
मौजा सिरसीकलां निवासी स्व. मुन्ना श्रीवास की पुत्री अंजलि (21) की शादी नौ फरवरी को जनपद झांसी के गरौठा निवासी प्रवेश कुमार के साथ हुई थी। 17 फरवरी को वर पक्ष के लोग पहली विदा के लिए घर आए थे। इसी दौरान पकवान बनते वक्त छोटे सिलिंडर में विस्फोट हुआ था। जिससे कढ़ाई के खौलते तेल की चपेट में आकर दुल्हन अंजलि समेत परिवार की सात महिलाएं गंभीर रूप से झुलस गईं और मकान में भी आग लग गई थी।
21 फरवरी की देर शाम इलाज के दौरान अंजलि की दादी जमुनिया की मौत हो गई थी। मंगलवार को अंजलि, उसकी चाची सुधा व प्रेमा की इलाज के दौरान मौत हुई और बुधवार को परिवार की सुशीला ने भी दम तोड़ दिया। अंजलि का अंतिम संस्कार उसकी ससुराल वालों ने गरौंठा में किया। बाकी चारों महिलाओं के शव सिरसीकलां गांव लाए गए। एक साथ एक ही परिवार की चार महिलाओं की अर्थियां उठते देख सभी की आंखें नम थी। ग्राम प्रधान राजू वर्मा, जिला पंचायत सदस्य तेजा शिवहरे ने परिजनों को ढांढ़स बंधाते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिया।
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डोली के चार दिन बाद उठी अर्थी
महोबा। नवविवाहिता अंजलि के पिता मुन्ना श्रीवास का 2009 में बीमारी के चलते निधन हो गया था। उसका एक पुत्र गुलशन अविवाहित है। पुत्री अंजलि को चाचा बबलू व बाबा रामनाथ ने मेहनत-मजदूरी कर पढ़ाया और फिर उसकी शादी भी कराई। किसी को क्या पता था कि डोली उठने के चार दिन बाद ही बेटी की अर्थी उठ जाएगी।
- चार दिनों में छूटा जन्मों का साथ
नई नवेली दुल्हन अंजलि की मौत से उसके ससुराल वाले भी काफी दुखी थे। परिवार के करीबियों ने बताया कि अंजलि के पति प्रवेश को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि जिसके साथ सात जन्मों का साथ निभाने की कसम ली थी, उसका साथ इस तरह चार दिनों में ही छूट जाएगा।
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मौजा सिरसीकलां निवासी स्व. मुन्ना श्रीवास की पुत्री अंजलि (21) की शादी नौ फरवरी को जनपद झांसी के गरौठा निवासी प्रवेश कुमार के साथ हुई थी। 17 फरवरी को वर पक्ष के लोग पहली विदा के लिए घर आए थे। इसी दौरान पकवान बनते वक्त छोटे सिलिंडर में विस्फोट हुआ था। जिससे कढ़ाई के खौलते तेल की चपेट में आकर दुल्हन अंजलि समेत परिवार की सात महिलाएं गंभीर रूप से झुलस गईं और मकान में भी आग लग गई थी।
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21 फरवरी की देर शाम इलाज के दौरान अंजलि की दादी जमुनिया की मौत हो गई थी। मंगलवार को अंजलि, उसकी चाची सुधा व प्रेमा की इलाज के दौरान मौत हुई और बुधवार को परिवार की सुशीला ने भी दम तोड़ दिया। अंजलि का अंतिम संस्कार उसकी ससुराल वालों ने गरौंठा में किया। बाकी चारों महिलाओं के शव सिरसीकलां गांव लाए गए। एक साथ एक ही परिवार की चार महिलाओं की अर्थियां उठते देख सभी की आंखें नम थी। ग्राम प्रधान राजू वर्मा, जिला पंचायत सदस्य तेजा शिवहरे ने परिजनों को ढांढ़स बंधाते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिया।
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डोली के चार दिन बाद उठी अर्थी
महोबा। नवविवाहिता अंजलि के पिता मुन्ना श्रीवास का 2009 में बीमारी के चलते निधन हो गया था। उसका एक पुत्र गुलशन अविवाहित है। पुत्री अंजलि को चाचा बबलू व बाबा रामनाथ ने मेहनत-मजदूरी कर पढ़ाया और फिर उसकी शादी भी कराई। किसी को क्या पता था कि डोली उठने के चार दिन बाद ही बेटी की अर्थी उठ जाएगी।
- चार दिनों में छूटा जन्मों का साथ
नई नवेली दुल्हन अंजलि की मौत से उसके ससुराल वाले भी काफी दुखी थे। परिवार के करीबियों ने बताया कि अंजलि के पति प्रवेश को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि जिसके साथ सात जन्मों का साथ निभाने की कसम ली थी, उसका साथ इस तरह चार दिनों में ही छूट जाएगा।