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कम उपज देख खेत पर किसान ने तोड़ा दम
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
Updated Wed, 08 Mar 2017 11:08 PM IST
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रोते बिलखते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कस्बा खरेला में कर्ज में दबे किसान की कम उपज देखकर खेत में सदमे से किसान गिर पड़े। परिजन इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। जहां पर से हालत नाजुक होने पर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। महोबा आते समय रास्ते में किसान की मौत हो गई।
कस्बा के मोहल्ला मानिक निवासी जागेश्वर (50) पुत्र गनेश प्रसाद साहू ने वर्ष 2008 में इलाहाबाद बैंक से एक लाख रुपये का केसीसी कार्ड बनवाया था। सात वर्षों से दैवीय आपदा के चलते फसल बर्बाद होने के कारण वह कर्ज अदा नहीं कर पाया था।
मंगलवार को वह खरेला मौजा में मटर की फसल की थ्रेसिंग कराने परिवार के साथ गया था। शाम करीब सात बजे थ्रेसिंग के दौरान कम उपज देखकर वह किनारे बैठ गया। थोड़ी देर बाद वह अचेत होकर गिर गया था। परिजनों ने आनन-फानन में उसे खरेला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गया। जहां से जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
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इलाज के लिए महोबा अस्पताल लाते समय किसान की मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृतक की पत्नी राजा का कहना है कि वह बैंक के बढ़ते कर्ज से आहत थे। साथ ही फसल का उत्पादन कम होने से उन्हें सदमा लग गया, जिससे उनकी मौत हो गई। चरखारी उपजिलाधिकारी मृदुल चौधरी का कहना है कि कृषक के मौत की जानकारी मिली है। राजस्व कर्मियों को जांच के लिए भेजा जाएगा।
30 बीघा भूमि के कास्तकार की मौत से उसकी पांच पुत्रियां दो पुत्रों के सिर से पिता का साया उठ गया है। विवाहित पुत्र बृजकिशोर ने बिलखते हुए बताया कि एक लाख रुपये का केसीसी कार्ड करीब 1.95 लाख ब्याज समेत बढ़कर हो गया था। मृतक की पत्नी राजा के अनुसार प्रति बीघा 80 किलोग्राम के मटर उपज के आंकलन की जानकारी जैसे ही थ्रेसिंग के दौरान उन्हें पुत्र ने दी। तभी वह खेत पर बैठ गए थे। झांसी में पढ़ रहे छोटे पुत्र बृजेश की पढ़ाई और घर का खर्च कैसे चलेगा यह चिल्लाकर वह अचेत हो जाती है।
मृतक कृषक जागेश्वर को दलहनी उपज की क्षतिपूर्ति बीमा की जानकारी तक नहीं मिली। पुत्र बृजकिशोर ने बताया कि सोमवार को पिता तहसील गए थे। राजस्वकर्मियों से मटर की कम उपज की क्षतिपूर्ति का बीमा मुआवजा कैसे मिलेगा यह जानकारी पूछी। शाम चार बजे लौटा तो बताया कि बैंक द्वारा ही बीमा की राशि मिलती है। लेकिन क्या पता था कि फसल की थ्रेसिंग से निकलने वाली कम उपज ही उनके जीवन का अंतिम दिन बन जाएगा।
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कस्बा के मोहल्ला मानिक निवासी जागेश्वर (50) पुत्र गनेश प्रसाद साहू ने वर्ष 2008 में इलाहाबाद बैंक से एक लाख रुपये का केसीसी कार्ड बनवाया था। सात वर्षों से दैवीय आपदा के चलते फसल बर्बाद होने के कारण वह कर्ज अदा नहीं कर पाया था।
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मंगलवार को वह खरेला मौजा में मटर की फसल की थ्रेसिंग कराने परिवार के साथ गया था। शाम करीब सात बजे थ्रेसिंग के दौरान कम उपज देखकर वह किनारे बैठ गया। थोड़ी देर बाद वह अचेत होकर गिर गया था। परिजनों ने आनन-फानन में उसे खरेला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गया। जहां से जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
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इलाज के लिए महोबा अस्पताल लाते समय किसान की मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृतक की पत्नी राजा का कहना है कि वह बैंक के बढ़ते कर्ज से आहत थे। साथ ही फसल का उत्पादन कम होने से उन्हें सदमा लग गया, जिससे उनकी मौत हो गई। चरखारी उपजिलाधिकारी मृदुल चौधरी का कहना है कि कृषक के मौत की जानकारी मिली है। राजस्व कर्मियों को जांच के लिए भेजा जाएगा।
30 बीघा भूमि के कास्तकार की मौत से उसकी पांच पुत्रियां दो पुत्रों के सिर से पिता का साया उठ गया है। विवाहित पुत्र बृजकिशोर ने बिलखते हुए बताया कि एक लाख रुपये का केसीसी कार्ड करीब 1.95 लाख ब्याज समेत बढ़कर हो गया था। मृतक की पत्नी राजा के अनुसार प्रति बीघा 80 किलोग्राम के मटर उपज के आंकलन की जानकारी जैसे ही थ्रेसिंग के दौरान उन्हें पुत्र ने दी। तभी वह खेत पर बैठ गए थे। झांसी में पढ़ रहे छोटे पुत्र बृजेश की पढ़ाई और घर का खर्च कैसे चलेगा यह चिल्लाकर वह अचेत हो जाती है।
मृतक कृषक जागेश्वर को दलहनी उपज की क्षतिपूर्ति बीमा की जानकारी तक नहीं मिली। पुत्र बृजकिशोर ने बताया कि सोमवार को पिता तहसील गए थे। राजस्वकर्मियों से मटर की कम उपज की क्षतिपूर्ति का बीमा मुआवजा कैसे मिलेगा यह जानकारी पूछी। शाम चार बजे लौटा तो बताया कि बैंक द्वारा ही बीमा की राशि मिलती है। लेकिन क्या पता था कि फसल की थ्रेसिंग से निकलने वाली कम उपज ही उनके जीवन का अंतिम दिन बन जाएगा।