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प्रशासन से नहीं मिली मदद तो किसानों ने चंदा एकत्रकर बनाई गोशाला
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खन्ना (महोबा)। कभी सूखा तो कभी दूसरी दैवी आपदाओं की मार से परेशान बुंदेलखंड के किसानों के लिए अन्ना मवेशी भी आफत बने हैं। प्रशासन से मदद की गुहार भी बेकार गई तो कबरई ब्लाक के बन्नी गांव के किसान टूटने के बजाय एकजुट हो गए। गांव के 40 किसानों ने 50 हजार रुपये चंदा जुटाकर न सिर्फ अस्थायी गोशाला तैयार कर दी। बल्कि इसमें चारा, भूसा और चरवाहे की व्यवस्था भी की। मात्र दो दिन में ही गोशाला में 40 अन्ना मवेशी लाए जा चुके हैं। बन्नी गांव के किसानों की एकजुटता और अनूठा प्रयास अन्य किसानों के लिए मिसाल बन गया है।
रबी फसल के दौरान किसानों ने खेतों में गेहूं, मटर व चना की फसल बोई है, लेकिन अन्ना मवेशियों के झुंड फसल चट कर रहे हैैं। रात दिन खेतों की रखवाली करने के बाद भी किसानों की फसल नहीं बच पा रही है। बन्नी गांव में गोशाला तो है, लेकिन इसमें मवेशियों के खानपान व रखरखाव की व्यवस्था न होने से अधिकांश गोवंश अन्ना घूम रहे हैैं। किसानों ने कई बार जिलाधिकारी को मामले से अवगत कराया और अन्ना गोवंशों को गोशाला में शिफ्ट कराए जाने की मांग की, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब किसानों की अस्थायी गोशाला में पशुओं के खानपान की व्यवस्था चंदे से एकत्र होने वाली रकम से की जाएगी। मवेशियों को चराने के लिए एक चरवाहा भी लगाया गया है। सचिव विक्रमादित्य का कहना है कि गांव में चंदा से गोशाला बनाए जाने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
बोले किसान
किसी ने नहीं सुनीं समस्या
अन्ना मवेशियों ने किसानों को परेशान कर रखा है। ठंड में रात दिन फसल की रखवाली करनी पड़ रही है। मवेशियों की व्यवस्था के लिए कोई नहीं सुन रहा है। तब चंदे से गोशाला बनाने की मुहिम शुरू की गई।
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बबलेश किसान
स्वयं उठाया बीड़ा
ग्रामीणों ने चंदा कर अस्थायी गोशाला बनाई है। चार-चार लोगों की देखरेख के लिए ड्यूटी लगेगी। समस्या के समाधान का स्वयं बीड़ा उठाया है। चुन्नीलाल, किसान
अब समस्या से मिलेगी निजात
रतजगा करने के बाद भी अन्ना पशुओं से फसलें नहीं बच रही हैं। अन्ना मवेशियों को लेकर आए दिन किसानों के बीच झगड़े होते थे। जिससे निजात मिलेगी। जागेश्वर, किसान
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रबी फसल के दौरान किसानों ने खेतों में गेहूं, मटर व चना की फसल बोई है, लेकिन अन्ना मवेशियों के झुंड फसल चट कर रहे हैैं। रात दिन खेतों की रखवाली करने के बाद भी किसानों की फसल नहीं बच पा रही है। बन्नी गांव में गोशाला तो है, लेकिन इसमें मवेशियों के खानपान व रखरखाव की व्यवस्था न होने से अधिकांश गोवंश अन्ना घूम रहे हैैं। किसानों ने कई बार जिलाधिकारी को मामले से अवगत कराया और अन्ना गोवंशों को गोशाला में शिफ्ट कराए जाने की मांग की, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब किसानों की अस्थायी गोशाला में पशुओं के खानपान की व्यवस्था चंदे से एकत्र होने वाली रकम से की जाएगी। मवेशियों को चराने के लिए एक चरवाहा भी लगाया गया है। सचिव विक्रमादित्य का कहना है कि गांव में चंदा से गोशाला बनाए जाने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
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बोले किसान
किसी ने नहीं सुनीं समस्या
अन्ना मवेशियों ने किसानों को परेशान कर रखा है। ठंड में रात दिन फसल की रखवाली करनी पड़ रही है। मवेशियों की व्यवस्था के लिए कोई नहीं सुन रहा है। तब चंदे से गोशाला बनाने की मुहिम शुरू की गई।
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बबलेश किसान
स्वयं उठाया बीड़ा
ग्रामीणों ने चंदा कर अस्थायी गोशाला बनाई है। चार-चार लोगों की देखरेख के लिए ड्यूटी लगेगी। समस्या के समाधान का स्वयं बीड़ा उठाया है। चुन्नीलाल, किसान
अब समस्या से मिलेगी निजात
रतजगा करने के बाद भी अन्ना पशुओं से फसलें नहीं बच रही हैं। अन्ना मवेशियों को लेकर आए दिन किसानों के बीच झगड़े होते थे। जिससे निजात मिलेगी। जागेश्वर, किसान