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नि:शक्त परिवार को रोटी बैंक ने लिया गोद
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
Updated Tue, 07 Feb 2017 10:26 PM IST
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रोटी बैंक के कार्यकर्ताओं ने मदद को बढ़ाए हाथ।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
कस्बा कबरई के मोहल्ला किदवईनगर निवासी एक ग्रामीण मजदूरी करते समय अपाहिज हो गया। वृद्ध पिता के कंधों पर परिवार को चलाने का बोझ आ गया। शासन प्रशासन से मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई सहायता नही मिली। पड़ोसियों से मांगकर पेट की आग बुझा रहे परिवार को रोटी बैंक के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को गोद ले लिया।
कार्यकर्ताओं ने परिवार के राशन की व्यवस्था करते हुए अपाहिज के पुत्र को बेहतर पढ़ाई कराने का भरोसा दिया। कस्बे के मोहल्ला किदवईनगर निवासी लेखराज प्रजापति दिल्ली में रहकर मेहनत मजदूरी का काम करता था। वर्ष 2007 में दिल्ली में भवन निर्माण के दौरान मजदूरी करते समय उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई।
ठेकेदार ने लेखराज को इलाज के लिए महज 15 हजार रुपये दिए, जिससे बेहतर उपचार नही हो सका। लेखराज 10 वर्ष से घर पर चरपाई पकड़े है। इस दौरान अपाहिज के परिजनों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई सहायता नही मिली।
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आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार का भरण पोषण मोहल्लेवासियों से मिलने वाली रोटी से हो रहा है। लेखराज का पुत्र शिवम आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाई छोड़कर घर बैठ गया है। मंगलवार को रोटी बैंक के कार्यकर्ताओं ने उसके घर पहुंच आटा, सब्जी दाल, पहनने के कपड़े, कंबल आदि देकर परिवार को गोद ले लिया। कार्यकर्ताओं ने बताया कि शहर में रोटी बैंक द्वारा प्रतिदिन भूखों को नि:शुल्क भोजन मुहैया कराने का काम किया जा रहा है।
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कार्यकर्ताओं ने परिवार के राशन की व्यवस्था करते हुए अपाहिज के पुत्र को बेहतर पढ़ाई कराने का भरोसा दिया। कस्बे के मोहल्ला किदवईनगर निवासी लेखराज प्रजापति दिल्ली में रहकर मेहनत मजदूरी का काम करता था। वर्ष 2007 में दिल्ली में भवन निर्माण के दौरान मजदूरी करते समय उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई।
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ठेकेदार ने लेखराज को इलाज के लिए महज 15 हजार रुपये दिए, जिससे बेहतर उपचार नही हो सका। लेखराज 10 वर्ष से घर पर चरपाई पकड़े है। इस दौरान अपाहिज के परिजनों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई सहायता नही मिली।
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आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार का भरण पोषण मोहल्लेवासियों से मिलने वाली रोटी से हो रहा है। लेखराज का पुत्र शिवम आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाई छोड़कर घर बैठ गया है। मंगलवार को रोटी बैंक के कार्यकर्ताओं ने उसके घर पहुंच आटा, सब्जी दाल, पहनने के कपड़े, कंबल आदि देकर परिवार को गोद ले लिया। कार्यकर्ताओं ने बताया कि शहर में रोटी बैंक द्वारा प्रतिदिन भूखों को नि:शुल्क भोजन मुहैया कराने का काम किया जा रहा है।