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Mahoba News: बेटियां बोलीं, देर रात तक आते थे फोन, सो नहीं पाते थे पिता
Thu, 04 Dec 2025 12:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Thu, 04 Dec 2025 12:14 AM IST
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फोटो 03 एमएएचपी 09 परिचय-घटना की जानकारी देतीं मृतक की बेटी नीलम व अंजलि। संवाद
महोबा। एसआईआर कार्य के सहयोग में लगे शिक्षामित्र शंकरलाल राजपूत की मौत के बाद परिजनों में कोहराम मचा है। मृतक की बेटी नीलम और अंजलि ने बताया कि पिता के मोबाइल पर देर रात तक फोन आते थे। इससे वह ठीक से सो भी नहीं पाते थे। काम का अधिक दबाव होने पर वह मानसिक रूप से परेशान रहते थे।
बेटियां पूजा, सोना ने बताया कि एसआईआर सर्वे में ड्यूटी लगने के बाद से वह घर पर अक्सर चर्चा करते थे कि काम का बोझ बहुत है। लगातार फोन आने से वह परेशान हो जाते थे। एक दिसंबर को वह घर नहीं लौटे, बुधवार को उनका शव कुएं में मिला। भतीजे विजेंद्र कुमार ने बताया कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। परिवार को आर्थिक सहायता के साथ एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दिलाई जाए। चार बेटियां पूजा, सोना, नीलम, अंजलि व बेटा राजवीर है। पिता की मौत के बाद से सभी का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया कि एसआईआर में सहयोग के लिए लगाए जाने के बाद से वह सुबह छह बजे उठकर दरवाजे पर बैठ जाते थे और लोगों के फार्म भरवाते थे। डिप्रेशन में रहने के चलते उन्होंने यह कदम उठाया। उधर, एडीएम कुंवर पंकज का कहना है कि पवा भाग संख्या 31 में 1,344 मतदाताओं के सापेक्ष 909 फार्मों का डिजिटलाइजेशन हो चुका है। बीएलओ की सहायता में लगाए गए कर्मचारियों को जागरूकता फैलाना व फार्म भरने में सहायता करने का काम दिया गया है। प्रत्यक्ष रूप से उनसे एसआईआर का कार्य नहीं लिया जा रहा है।
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बेटियां पूजा, सोना ने बताया कि एसआईआर सर्वे में ड्यूटी लगने के बाद से वह घर पर अक्सर चर्चा करते थे कि काम का बोझ बहुत है। लगातार फोन आने से वह परेशान हो जाते थे। एक दिसंबर को वह घर नहीं लौटे, बुधवार को उनका शव कुएं में मिला। भतीजे विजेंद्र कुमार ने बताया कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। परिवार को आर्थिक सहायता के साथ एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दिलाई जाए। चार बेटियां पूजा, सोना, नीलम, अंजलि व बेटा राजवीर है। पिता की मौत के बाद से सभी का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया कि एसआईआर में सहयोग के लिए लगाए जाने के बाद से वह सुबह छह बजे उठकर दरवाजे पर बैठ जाते थे और लोगों के फार्म भरवाते थे। डिप्रेशन में रहने के चलते उन्होंने यह कदम उठाया। उधर, एडीएम कुंवर पंकज का कहना है कि पवा भाग संख्या 31 में 1,344 मतदाताओं के सापेक्ष 909 फार्मों का डिजिटलाइजेशन हो चुका है। बीएलओ की सहायता में लगाए गए कर्मचारियों को जागरूकता फैलाना व फार्म भरने में सहायता करने का काम दिया गया है। प्रत्यक्ष रूप से उनसे एसआईआर का कार्य नहीं लिया जा रहा है।
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