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फसल बीमा घोटाला: किसी को उधारी चुकाने तो किसी को कृषि यंत्र दिलाने के नाम पर ठगा

Tue, 30 Dec 2025 11:52 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा Updated Tue, 30 Dec 2025 11:52 PM IST
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Crop insurance scam: Some were cheated in the name of repaying loans, while others were defrauded under the pretext of providing agricultural equipment.
महोबा। जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। इसमें कृषि विभाग के कर्मचारियों ने दलालों से मिलीभगत करके किसी व्यक्ति से ली गई उधार रकम के बदले बीमा क्लेम की राशि बैंक खाते में डलवा दी। कई मामलों में कृषि यंत्र दिलाने का झांसा देकर क्लेम की राशि किसानाें के खातों में डालने के बाद वापस ले ली। इस धोखाधड़ी में करोड़ों रुपये की हेराफेरी हुई है लेकिन विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता के चलते अभी तक किसी भी अधिकारी या कर्मचारी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई है।खरीफ-2024 में जिले के किसानों के नाम पर 88 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम पास हुआ था। जब किसानों के खातों में धनराशि नहीं पहुंची तो मामले की छानबीन शुरू हुई। इसमें 40 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का खुलासा हुआ। अब तक 250 से अधिक लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है और 32 लोग जेल जा चुके हैं। हालांकि, इस मामले में रोजाना नए तथ्य सामने आ रहे हैं जिनमें कृषि विभाग के कर्मचारियों की संलिप्तता प्रमुख है।
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जय जवान जय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष गुलाब सिंह राजपूत के अनुसार दलालों और कृषि विभाग के कर्मचारियों ने मिलकर किसानों की जानकारी के बिना उनकी जमीनों पर फसल बीमा कराया। इसके बाद बीमा क्लेम की भारी-भरकम राशि हड़पने के लिए विभिन्न हथकंडे अपनाए गए। एक चौंकाने वाला मामला यह सामने आया है कि उस समय जनपद के कृषि विभाग में अटैच मध्य प्रदेश के सागर क्षेत्र के एक व्यक्ति ने बीमा से जुड़े कार्यों में धांधली की।
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इस मामले में सागर जिले के छह लोगों को महोबा के श्रीनगर क्षेत्र के सिजवाहा गांव का किसान बताकर उनकी जमीनों पर फर्जी बीमा कराया गया और क्लेम की राशि जारी की गई। बीमा क्लेम प्राप्त करने वाले लोगों ने बताया कि कृषि विभाग महोबा में कार्यरत एक रिश्तेदार ने उनसे किसी अत्यावश्यक कार्य के लिए रुपये उधार लिए थे। जब उन्होंने रुपये वापस मांगे तो उनके बैंक खातों में बीमा क्लेम की राशि डलवा दी गई। उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि यह राशि फसल बीमा में फर्जीवाड़ा करके उनके खाते में आई है।
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एक अन्य तरीके में, कबरई ब्लॉक के पवा और मुरानी गांवों के किसानों को कृषि यंत्र दिलाने का लालच दिया गया। कृषि विभाग के कर्मचारियों ने बीमा क्लेम की राशि किसानों के खातों में भेजी और फिर नकदी अपने पास रख ली। किसानों से वादा किया गया कि कुछ दिनों में उन्हें कृषि यंत्र मिल जाएंगे। पवा गांव के किसान धर्मसिंह ने इस संबंध में शिकायत भी दर्ज कराई लेकिन संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई।



अधिकारियों की भूमिका और कार्रवाई



यह सब कुछ कृषि विभाग के कार्यालय में ही चलता रहा और अधिकारी मूकदर्शक बने रहे। जब मामला उजागर हुआ, तो कृषि बीमा का पटल देख रहे पटल सहायक अतुलेंद्र विक्रम सिंह को निलंबित कर दिया गया। फील्ड का काम देख रहे देवेंद्र राजपूत को उनके मूल विभाग भूमि संरक्षण कार्यालय कुलपहाड़ भेज दिया गया है। हालांकि पुलिस की जांच से ये कर्मचारी अभी भी दूर हैं।



उप कृषि निदेशक रामसजीवन का कहना है कि देवेंद्र को उनके मूल कार्यालय में भेज दिया गया है और मामले की जांच चल रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले में किसानों के हक पर डाका डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
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